राजस्थान विधानसभा में बजट बहस शुरू, देवस्थान विभाग की धर्मशालाओं को BOT मॉडल पर विकसित करने का प्रस्ताव चर्चा में
राजस्थान विधानसभा में बुधवार को राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट अनुमान पेश किए। अब सदन में इन बजट प्रस्तावों पर बहस शुरू हो गई है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सभी दलों को समय आवंटित करेंगे। बजट पर बहस के बाद विभागवार कटौती प्रस्ताव पेश किए जाएंगे और उसके बाद ही बजट पारित होगा। फिलहाल विपक्ष की ओर से बजट का “पोस्टमार्टम” जारी है और कई प्रस्तावों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस बार बजट में देवस्थान विभाग को लेकर सरकार की घोषणा भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। वित्त मंत्री दीया कुमारी ने बजट भाषण में कहा कि देवस्थान विभाग की धर्मशालाओं की मरम्मत और जीर्णोद्धार के कार्य किए जाएंगे। इसके अलावा, श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के लिए देवस्थान विभाग के अधीन रिक्त भूमि पर धर्मशालाओं के निर्माण और संचालन के लिए Build-Operate-Transfer (BOT) आधारित नीति बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
इस घोषणा को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं कि क्या सरकार देवस्थान विभाग की जमीनों को धर्मशालाओं के संचालन के नाम पर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे मॉडल में पारदर्शिता और भूमि संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होना जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि BOT मॉडल से निवेश बढ़ सकता है और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं, लेकिन इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक संपत्ति और धार्मिक स्थलों का लाभ निजी कंपनियों के हाथों में सीमित न हो।
बजट बहस में अब यह विषय प्रमुख रूप से उठेगा और सदन में इसे लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। प्रशासन और सरकार को इस प्रस्ताव के पारदर्शी क्रियान्वयन और भूमि संरक्षण की जिम्मेदारी सुनिश्चित करनी होगी।

