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धर्मेंद्र प्रधान के बचाव में उतरे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, वीडियो में बोले- 'उन्होंने बड़े दिल से दिया इस्तीफा, किसी भी स्तर पर दोषी नहीं'

धर्मेंद्र प्रधान के बचाव में उतरे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, वीडियो में बोले- 'उन्होंने बड़े दिल से दिया इस्तीफा, किसी भी स्तर पर दोषी नहीं'

केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण नवाचार किए हैं और वे किसी भी स्तर पर दोषी नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रधान ने इस्तीफा केवल इसलिए दिया ताकि प्रधानमंत्री किसी दुविधा में न रहें और यह उनके बड़े दिल और जिम्मेदार नेतृत्व का परिचायक है।

"शिक्षा सुधार में अहम भूमिका निभाई"

शनिवार को भास्कर डिजिटल से बातचीत में मदन राठौड़ ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल कीं और सुधारों को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का कोई आधार नहीं है।राठौड़ ने कहा कि, "धर्मेंद्र प्रधान किसी भी स्तर पर दोषी नहीं हैं। उन्होंने केवल इसलिए इस्तीफा दिया ताकि प्रधानमंत्री किसी असमंजस या दुविधा में न रहें। यह उनके बड़प्पन और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है।"

विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा के मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। उनके अनुसार, जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में वास्तविक छात्रों के साथ-साथ ऐसे लोग भी शामिल हो गए थे, जिनका उद्देश्य आंदोलन को भटकाना था।उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक और उपद्रवी तत्वों ने प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और हिंसक गतिविधियों में हिस्सा लिया।

राष्ट्रविरोधी नारे लगाने का आरोप

मदन राठौड़ ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने राष्ट्रविरोधी नारे लगाए और ऐसे नारे किसी भी छात्र आंदोलन का हिस्सा नहीं हो सकते।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित एजेंसियों की ओर से इस संबंध में जो भी आधिकारिक जानकारी या जांच सामने आएगी, उसी के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

"असली छात्र आंदोलन से अलग हो गए"

राठौड़ ने कहा कि जब वास्तविक छात्रों को कथित रूप से आंदोलन में बाहरी और उपद्रवी तत्वों की मौजूदगी का पता चला, तो उन्होंने स्वयं को धरने से अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दों का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होना चाहिए, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था स्वीकार्य नहीं हो सकती।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक ओर विपक्ष इसे छात्र आंदोलन की जीत बता रहा है, वहीं भाजपा नेतृत्व इसे नैतिक जिम्मेदारी और संगठनात्मक निर्णय के रूप में पेश कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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