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जयपुर नगर निगम चुनाव में BJP-कांग्रेस के बागी नहीं माने, वीडियो में जाने  BJP के 16, कांग्रेस के 9 प्रत्याशी मैदान में डटे; कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला

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जयपुर नगर निगम चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज बागी उम्मीदवारों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नाम वापसी के आखिरी दिन तक दोनों दल अपने सभी बागियों को मनाने में सफल नहीं हो सके। भाजपा के 16 बागी प्रत्याशी अब पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के सामने चुनावी चुनौती बने हुए हैं, जबकि कांग्रेस के 9 बागी भी मैदान में डटे हैं। ऐसे में कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं।

बागियों ने बिगाड़ा दोनों दलों का गणित

टिकट वितरण के बाद नाराज हुए नेताओं और दावेदारों ने पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया। नाम वापसी की समयसीमा खत्म होने के बाद अब भाजपा के 16 और कांग्रेस के 9 बागी चुनाव मैदान में रह गए हैं।बागियों की मौजूदगी से उन वार्डों में समीकरण बदल सकते हैं, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था। बागी प्रत्याशी पार्टी के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं, जिसका सीधा असर अधिकृत उम्मीदवारों की जीत-हार पर पड़ सकता है।

दीया कुमारी ने संभाली बागियों को मनाने की कमान

विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के नाराज नेताओं और बागी प्रत्याशियों को मनाने की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने संभाली। उन्होंने गुरुवार को एक दर्जन से ज्यादा नाराज नेताओं और बागी दावेदारों से बातचीत की और उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश की।हालांकि सभी बागियों को मनाने में पार्टी सफल नहीं हो सकी।

वार्ड नंबर 3 में सबसे ज्यादा बागी

विद्याधर नगर क्षेत्र के वार्ड नंबर 3 में भाजपा के सबसे ज्यादा छह बागी प्रत्याशी मैदान में उतरने की बात सामने आई। यहां भाजपा ने भवानी शंकर शर्मा को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से छगन कुलदीप चुनाव मैदान में हैं।हालांकि इस वार्ड में भाजपा के बागियों के नाम वापस लेने के बाद पार्टी को बड़ी राहत मिली है। इससे अधिकृत प्रत्याशी के सामने चुनौती कम हुई है और भाजपा के चुनावी समीकरण पहले की तुलना में मजबूत हुए हैं।

कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

जहां भाजपा और कांग्रेस के बागी अभी भी मैदान में हैं, वहां मुकाबला अब सिर्फ दो दलों के बीच नहीं रहेगा। बागी प्रत्याशियों के कारण त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन सकती है। अब दोनों पार्टियों के सामने चुनौती सिर्फ अपने प्रत्याशी को जिताने की नहीं, बल्कि बागियों के प्रभाव को सीमित करने की भी है। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी संगठन इन बागियों को कितना नुकसान पहुंचा पाता है और वे कितने वोट अपने पक्ष में खींचते हैं, यह नतीजों में अहम भूमिका निभा सकता है।

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