बिट्स पिलानी को पूर्व छात्र दंपति का 4 मिलियन डॉलर का अनुदान, अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत योगदान
देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस, बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स) पिलानी को अमेरिका स्थित पूर्व छात्र दंपति ने बड़ा आर्थिक सहयोग दिया है। वर्ष 1968 बैच के पूर्व छात्र चांद पी. गर्ग और उनकी पत्नी मंजू गर्ग ने संस्थान को 4 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 33 करोड़ रुपये) का अनुदान प्रदान किया है। यह किसी पूर्व छात्र द्वारा संस्थान को दिया गया अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत योगदान माना जा रहा है।
संस्थान प्रशासन के अनुसार, यह राशि शिक्षा, शोध और नवाचार गतिविधियों को बढ़ावा देने में उपयोग की जाएगी। इस सहयोग से छात्रों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और अकादमिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
चांद पी. गर्ग बिट्स पिलानी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हुए। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने कई देशों में व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार किया और वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल की।
गर्ग ने कहा कि उनकी व्यवसायिक सफलता और आजीवन सीखने की मजबूत नींव बिट्स पिलानी में मिली शिक्षा से ही तैयार हुई। उन्होंने बताया कि संस्थान ने उन्हें न केवल तकनीकी ज्ञान दिया, बल्कि समस्याओं को सुलझाने की क्षमता, नेतृत्व कौशल और नवाचार की सोच भी विकसित की। यही कारण है कि वे अपने अल्मा मेटर को वापस कुछ देना चाहते थे।
उनकी पत्नी मंजू गर्ग ने भी शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं को बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध कराना समाज के विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका यह योगदान छात्रों को अपने सपनों को साकार करने में मदद करेगा।
बिट्स पिलानी प्रशासन और फैकल्टी ने इस उदार सहयोग के लिए दंपति का आभार जताया है। संस्थान के अधिकारियों ने इसे प्रेरणादायक कदम बताते हुए कहा कि इससे अन्य पूर्व छात्रों को भी संस्थान से जुड़कर योगदान देने की प्रेरणा मिलेगी।
गौरतलब है कि बिट्स पिलानी देश-विदेश में अपने उत्कृष्ट शिक्षा स्तर, शोध कार्य और उद्योग जगत से मजबूत संबंधों के लिए जाना जाता है। ऐसे में पूर्व छात्रों का सहयोग संस्थान की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा। यह अनुदान न केवल आर्थिक मदद है, बल्कि संस्थान और उसके पूर्व छात्रों के बीच मजबूत रिश्तों का प्रतीक भी है।

