परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा, फुटेज में जाने आरटीओ इंस्पेक्टर ने खड़ी की अवैध वसूली की गैंग
राजस्थान के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका बड़ा खुलासा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में सामने आया है। एसीबी ने खुलासा किया है कि एक आरटीओ इंस्पेक्टर ने सुनियोजित तरीके से अवैध वसूली की पूरी गैंग खड़ी कर रखी थी, जो हाईवे से लेकर विभागीय कामकाज तक सक्रिय थी। इस गैंग में दलालों की भूमिका तय थी और उन्हें हर वसूली पर फिक्स कमीशन दिया जाता था।
एसीबी की जांच के अनुसार, आरटीओ इंस्पेक्टर के इशारे पर दलाल वाहनों, ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और अन्य परिवहन से जुड़े कार्यों की एक तय सूची के आधार पर रिश्वत की रकम वसूलते थे। यह राशि सीधे इंस्पेक्टर तक पहुंचाई जाती थी। अवैध वसूली का यह पूरा नेटवर्क इतने व्यवस्थित तरीके से चल रहा था कि आम लोगों और वाहन चालकों को मजबूरी में रिश्वत देनी पड़ रही थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान के विभिन्न हाईवे पर अवैध वाहन संचालन और ओवरलोडिंग को इस गैंग ने कमाई का बड़ा जरिया बना रखा था। ओवरलोड वाहनों और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहले से सूची तैयार की जाती थी। इसके बाद दलाल मौके पर पहुंचकर वाहन चालकों से तय रकम वसूलते थे। अगर कोई चालक रिश्वत देने से इनकार करता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी जाती थी।
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक इंस्पेक्टर तक सीमित नहीं हो सकता। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस अवैध वसूली के खेल में और भी कर्मचारी या अधिकारी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल एसीबी ने अवैध वसूली के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गहन जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इंस्पेक्टर और दलालों के बीच नियमित संपर्क था और वसूली की रकम का हिसाब-किताब भी बाकायदा रखा जाता था। किस काम के लिए कितनी रिश्वत ली जाएगी, यह पहले से तय था। इससे यह साफ होता है कि भ्रष्टाचार कोई छिटपुट मामला नहीं, बल्कि एक संगठित सिस्टम के तहत चल रहा था।
इस खुलासे के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता लंबे समय से विभाग में रिश्वतखोरी की शिकायतें करती आ रही थी, लेकिन अब एसीबी की कार्रवाई ने उन आरोपों को मजबूत आधार दे दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस तरह के नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं की जाती, तो भ्रष्टाचार और गहराता चला जाता है।
एसीबी ने संकेत दिए हैं कि जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं और अवैध वसूली से जुड़े दस्तावेजों व डिजिटल सबूतों की भी जांच की जा रही है। वहीं, विभागीय स्तर पर भी इस मामले के सामने आने के बाद हलचल तेज हो गई है।
कुल मिलाकर, आरटीओ इंस्पेक्टर द्वारा अवैध वसूली की गैंग खड़े करने का यह मामला न सिर्फ परिवहन विभाग की छवि को धूमिल करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भ्रष्टाचार किस तरह आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालता है। अब सबकी नजरें एसीबी की जांच पर टिकी हैं कि इस नेटवर्क में शामिल सभी दोषियों तक कार्रवाई कब और कैसे पहुंचती है।

