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फर्जी विदेशी MBBS डिग्री घोटाले में बड़ा खुलासा: वेरिफिकेशन ऑफिसर गिरफ्तार, राजस्थान मेडिकल काउंसिल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

फर्जी विदेशी MBBS डिग्री घोटाले में बड़ा खुलासा: वेरिफिकेशन ऑफिसर गिरफ्तार, राजस्थान मेडिकल काउंसिल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

राजस्थान मेडिकल काउंसिल में फर्जी विदेशी एमबीबीएस डिग्री और प्रमाण पत्रों के आधार पर रजिस्ट्रेशन कराने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में वेरिफिकेशन ऑफिसर की गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले की जड़ें और गहरी होती नजर आ रही हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ फर्जी दस्तावेजों का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर संभावित मिलीभगत का भी संकेत है।

एसओजी की कार्रवाई के बाद चिकित्सा जगत और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

जांच में सामने आया है कि विदेशी मेडिकल डिग्रियों और प्रमाण पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। जिन दस्तावेजों की गहन जांच होनी चाहिए थी, उन्हें कथित रूप से बिना पर्याप्त सत्यापन के स्वीकार कर लिया गया।

वेरिफिकेशन ऑफिसर की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन आखिर कैसे मंजूर किए गए।

एसओजी को मिली अहम जानकारी

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान एसओजी को ऐसे कई दस्तावेज और तथ्य मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने, सत्यापन कराने और रजिस्ट्रेशन दिलाने की पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

मरीजों की सुरक्षा पर भी चिंता

फर्जी डिग्री के आधार पर रजिस्ट्रेशन हासिल करने वाले लोग यदि चिकित्सा सेवाएं दे रहे थे, तो यह मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और आम लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता है।

पुराने रजिस्ट्रेशन भी जांच के दायरे में

एसओजी अब राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पिछले वर्षों के दौरान हुए रजिस्ट्रेशन की भी जांच कर सकती है। आशंका है कि फर्जी विदेशी डिग्रियों के आधार पर रजिस्ट्रेशन का यह मामला एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।

जांच एजेंसी संबंधित रिकॉर्ड, फाइलों और सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

सिस्टम में मिलीभगत की आशंका

वेरिफिकेशन ऑफिसर की गिरफ्तारी के बाद यह संभावना मजबूत हुई है कि घोटाले को अंजाम देने में कुछ अंदरूनी लोगों की भूमिका भी हो सकती है। एसओजी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या यह सिर्फ लापरवाही थी या फिर सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेजों को वैध बनाने का प्रयास किया गया।

आगे और गिरफ्तारियां संभव

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों या बिचौलियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल एसओजी पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। इस मामले ने न केवल राजस्थान मेडिकल काउंसिल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं

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