राजस्थान के लाखों विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत, अब स्कूलों से ही होंगे छात्रवृत्ति आवेदन
प्रदेश के सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विभिन्न प्रकार की पूर्व एवं उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए स्वयं आवेदन नहीं करना होगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा इस संबंध में नए निर्देश जारी किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब सभी छात्रवृत्ति प्रस्ताव विद्यालय स्तर से ही तैयार किए जाएंगे और उन्हें ऑनलाइन माध्यम से आगे भेजा जाएगा।
इस नई प्रणाली में विद्यालय प्रशासन की भूमिका को बढ़ाते हुए शाला दर्पण बेनिफिशयरी स्कीम पोर्टल के माध्यम से सभी छात्रवृत्ति प्रस्ताव ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। इसके लिए संस्था प्रधानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे विद्यार्थियों के पात्रता संबंधी विवरण की जांच कर प्रस्ताव तैयार करें और उन्हें प्रमाणित करें।
शिक्षा विभाग के अनुसार इस बदलाव का उद्देश्य छात्रवृत्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और तेज बनाना है। अक्सर देखा जाता था कि कई विद्यार्थी तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में समय पर आवेदन नहीं कर पाते थे, जिससे वे योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते थे। नई व्यवस्था से इस समस्या को काफी हद तक दूर करने की उम्मीद है।
निर्देशों के अनुसार संस्था प्रधानों को सभी प्रस्ताव तैयार कर उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रमाणित करना होगा। इसके लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है। तय समय सीमा के बाद प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
विद्यालय स्तर पर इस प्रक्रिया के लागू होने से न केवल विद्यार्थियों पर आवेदन का बोझ कम होगा, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया भी अधिक सुव्यवस्थित हो जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे गलतियों की संभावना कम होगी और वास्तविक पात्र विद्यार्थियों को समय पर लाभ मिल सकेगा।
राज्य के शिक्षा विशेषज्ञों ने इस कदम को सकारात्मक बताया है। उनका कहना है कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से छात्रवृत्ति वितरण अधिक प्रभावी और पारदर्शी होगा। साथ ही, इससे स्कूल प्रशासन की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
अभिभावकों और विद्यार्थियों में भी इस निर्णय को लेकर राहत की भावना देखी जा रही है, क्योंकि अब उन्हें अलग-अलग पोर्टल या कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

