राजस्थान में ट्रांसफर सिस्टम पर बड़ा सवाल: ‘A+ नोटशीट’ रोकी गई, 261 तबादले अटके; ‘A कैटेगरी’ के 1889 प्रस्ताव भी लंबित
राजस्थान में सरकारी तबादलों को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से उच्च प्राथमिकता के रूप में भेजी गई ‘A-प्लस’ कैटेगरी की ट्रांसफर नोटशीट को विभागों के अपर मुख्य सचिव (ACS), प्रमुख सचिव और सचिवों ने रोक दिया। हैरानी की बात यह है कि इस श्रेणी के तहत आने वाले 261 तबादले अब तक हुए ही नहीं।
सूत्रों के अनुसार, केवल ‘A-प्लस’ ही नहीं, बल्कि ट्रांसफर से जुड़ी ‘A कैटेगरी’ की नोटशीट भी विभागीय स्तर पर अटक गई है, जिससे करीब 1889 तबादला प्रस्ताव लंबित हो गए हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में चर्चा का माहौल पैदा कर दिया है।
CMO से भेजे गए प्रस्तावों पर भी ब्रेक
जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय से जिन ट्रांसफर प्रस्तावों को सर्वोच्च प्राथमिकता के तौर पर भेजा गया था, उन्हें भी विभागीय स्तर पर आगे नहीं बढ़ाया गया। सामान्यत: ‘A+’ कैटेगरी के मामलों को तुरंत निस्तारित करने की प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन इस बार स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है।
प्रशासनिक हलकों में इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने महत्वपूर्ण प्रस्तावों को रोकने के पीछे क्या कारण हैं और क्या यह किसी नीति या प्रक्रिया के तहत किया गया निर्णय है।
261 ‘A+’ ट्रांसफर अटके, 1889 प्रस्ताव लंबित
सूत्रों के अनुसार, ‘A-प्लस’ श्रेणी में कुल 261 तबादला प्रस्ताव शामिल थे, जो अब तक मूर्त रूप नहीं ले पाए हैं। इसके अलावा ‘A’ कैटेगरी में शामिल 1889 ट्रांसफर फाइलें भी विभागीय स्तर पर रुकी हुई हैं।
इन प्रस्तावों के अटकने से विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की पोस्टिंग और प्रशासनिक संतुलन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासनिक तंत्र में बढ़ी चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सचिवालय और विभागीय दफ्तरों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि यह प्रक्रिया से जुड़ा मामला हो सकता है, जबकि कुछ इसे प्रशासनिक स्तर पर निर्णयों में देरी का संकेत मान रहे हैं।
फिलहाल सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
तबादला प्रक्रिया पर उठे सवाल
तबादला नीति और उसके क्रियान्वयन को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार CMO से जुड़े उच्च प्राथमिकता वाले प्रस्तावों के अटकने से मामला और गंभीर माना जा रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देती है और लंबित ट्रांसफर प्रस्तावों पर कब तक निर्णय लिया जाता है।

