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राजस्थान में बड़ा राजनीतिक बदलाव: अब दो से अधिक संतान वाले भी लड़ सकेंगे पंचायत और निकाय चुनाव

राजस्थान में बड़ा राजनीतिक बदलाव: अब दो से अधिक संतान वाले भी लड़ सकेंगे पंचायत और निकाय चुनाव

राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव करने की तैयारी में नजर आ रही है। राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब पंचायत और नगर निकाय चुनावों में लागू दो संतान की अनिवार्यता समाप्त की जाएगी। इस फैसले के बाद तीन या उससे अधिक बच्चों वाले व्यक्ति भी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में उम्मीदवार बन सकेंगे।

सरकार की ओर से विधानसभा में पेश किए गए जवाब में इस बदलाव की पुष्टि की गई है। लंबे समय से लागू इस नियम के कारण दो से अधिक संतान वाले कई लोग चुनाव लड़ने से वंचित रह जाते थे। अब प्रस्तावित संशोधन के बाद ऐसे लोगों को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का मौका मिलेगा।

दरअसल, राजस्थान में पूर्व में बनाए गए कानून के तहत दो से ज्यादा बच्चों वाले व्यक्तियों को पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता था। इस नियम का उद्देश्य परिवार नियोजन को बढ़ावा देना और जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करना था। हालांकि, समय के साथ इस प्रावधान को लेकर कई बार बहस छिड़ती रही। कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए खत्म करने की मांग की थी।

भजनलाल शर्मा सरकार के इस कदम को राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इससे बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को चुनावी मैदान में उतरने का अवसर मिलेगा, जो अब तक इस नियम के चलते वंचित थे। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है, जहां पारंपरिक रूप से बड़े परिवार आम हैं।

सरकार का तर्क है कि लोकतंत्र में हर नागरिक को चुनाव लड़ने का समान अधिकार मिलना चाहिए। किसी व्यक्ति की पारिवारिक स्थिति को उसकी राजनीतिक भागीदारी में बाधा नहीं बनना चाहिए। इसी सोच के तहत यह बदलाव लाया जा रहा है।

हालांकि, इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे परिवार नियोजन की नीति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जबकि समर्थकों का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए जागरूकता और शिक्षा अधिक प्रभावी उपाय हैं, न कि चुनावी प्रतिबंध।

विधानसभा में सरकार के जवाब के बाद यह साफ हो गया है कि जल्द ही इस संबंध में विधायी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नियम में संशोधन होते ही आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनाव नए प्रावधानों के तहत कराए जाएंगे।

कुल मिलाकर, भजनलाल शर्मा सरकार का यह फैसला प्रदेश की स्थानीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे चुनावी समीकरण बदलने के साथ-साथ अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में इस निर्णय का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिलेगा।

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