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राजस्थान में चंदन वन विकसित करने की बड़ी पहल: बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में बनेगा ‘ग्रीन इनिशिएटिव’, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

राजस्थान में चंदन वन विकसित करने की बड़ी पहल: बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में बनेगा ‘ग्रीन इनिशिएटिव’, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य के बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर जिलों में चंदन के वन विकसित किए जाएंगे।

सरकार की इस नई पहल का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना ही नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना है। चंदन की लकड़ी अपने औषधीय और व्यावसायिक महत्व के लिए दुनिया भर में जानी जाती है, जिससे भविष्य में राज्य को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

योजना के अनुसार इन जिलों में बड़े पैमाने पर चंदन के पौधे लगाए जाएंगे और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग और संबंधित एजेंसियों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह परियोजना न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में हरित रोजगार (ग्रीन जॉब्स) को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि चंदन वन विकसित करने की यह पहल राजस्थान जैसे शुष्क और अर्ध-शुष्क राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि इससे जैव विविधता बढ़ेगी और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों को मॉडल सैंडलवुड जोन के रूप में विकसित किया जाए, जिससे राजस्थान की पहचान एक हरित और आर्थिक रूप से मजबूत राज्य के रूप में स्थापित हो सके।

इस निर्णय को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसकी सराहना विभिन्न पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों द्वारा की जा रही है।

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