राजस्थान में बाल विवाह से जुड़े एक मामले में अदालत ने अहम और कड़ा फैसला सुनाया है। राजस्थान हाईकोर्ट के अंतर्गत आने वाले एक फैमिली कोर्ट ने एक महिला की शादी को रद्द कर दिया, जिसकी शादी बचपन में ही तय कर दी गई थी।
जानकारी के अनुसार, महिला की शादी लगभग 9 साल पहले उसके परिवार वालों ने नाबालिग अवस्था में तय की थी। समय बीतने के बाद जब ससुराल पक्ष की ओर से उसे साथ ले जाने का दबाव बनाया गया, तो महिला ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का रुख किया।
मामले की सुनवाई फैमिली कोर्ट में हुई, जहां सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने शादी को निरस्त करने का निर्णय लिया। अदालत ने माना कि बाल विवाह कानूनन अमान्य है और नाबालिग अवस्था में किए गए ऐसे विवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता।
इस फैसले को बाल अधिकारों की सुरक्षा और कानून के पालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के निर्णय समाज में जागरूकता बढ़ाने और बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने में मददगार साबित होंगे।
कुल मिलाकर, यह फैसला न केवल पीड़िता के लिए न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह समाज में बाल विवाह के खिलाफ एक सख्त संदेश भी देता है।

