राजस्थान यूनिवर्सिटी परीक्षा में बड़ा विवाद: प्रश्नपत्र में सवालों के साथ छपे मिले उत्तर, छात्रों ने लगाए AI से पेपर तैयार होने के आरोप
राजस्थान यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला समाजशास्त्र (Sociology) सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा से जुड़ा है, जहां छात्रों को मिले प्रश्नपत्र में गंभीर लापरवाही सामने आई है। परीक्षा के दौरान छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रश्नों के साथ ही उनके उत्तर और संबंधित थ्योरी भी प्रश्नपत्र में ही छपी हुई थी। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, परीक्षा शुरू होते ही कई छात्रों ने प्रश्नपत्र को देखकर हैरानी जताई। उनका कहना है कि पेपर में न केवल सवाल शामिल थे, बल्कि उनके विस्तृत उत्तर और थ्योरी भी उसी में छपी हुई थीं, जो सामान्य परीक्षा प्रक्रिया के बिल्कुल विपरीत है। आमतौर पर परीक्षा में केवल प्रश्न पूछे जाते हैं और छात्रों से उनके उत्तर अपेक्षित होते हैं।
छात्रों ने इस पूरे मामले को गंभीर लापरवाही बताते हुए आरोप लगाया है कि यह प्रश्नपत्र संभवतः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है और उसे बिना उचित जांच और समीक्षा के ही परीक्षा में बांट दिया गया। छात्रों का कहना है कि यदि पेपर की सही तरीके से मॉनिटरिंग की गई होती तो ऐसी बड़ी गलती सामने नहीं आती।
इस घटना के बाद परीक्षा केंद्रों पर कुछ समय के लिए भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न हो गई। कई छात्रों ने परीक्षा रोकने और नए प्रश्नपत्र की मांग की। हालांकि, इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वास्तव में प्रश्नपत्र में उत्तर और थ्योरी शामिल थी, तो यह परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामी को दर्शाता है। इससे न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, बल्कि छात्रों के भविष्य पर भी इसका असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि यदि AI का उपयोग पेपर सेटिंग में किया गया है, तो उसे बिना मानवीय जांच के उपयोग करना एक बड़ी चूक है।
छात्र संगठनों ने इस मामले में जांच की मांग की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की गलतियां दोबारा न हों।
फिलहाल, पूरे मामले को लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर जांच की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि परीक्षा दोबारा कराई जाएगी या नहीं।
इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली में तकनीक के उपयोग और उसकी निगरानी को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर निर्भरता शिक्षा व्यवस्था में नए तरह के जोखिम पैदा कर रही है।

