भीलवाड़ा शहर के चौराहे अब सुंदरता के प्रतीक नहीं, बल्कि हादसों के ‘डेथ पॉइंट’ बनते जा रहे हैं। नगर निगम द्वारा बनाए गए कई सर्कल और स्ट्रक्चर वाहन चालकों के लिए खतरा साबित हो रहे हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम के इंजीनियरों ने बिना पर्याप्त तकनीकी मूल्यांकन के ऐसे ढांचे तैयार कर दिए हैं, जो सड़क सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते। इन स्ट्रक्चर के कारण वाहन चालकों को दृश्यता में दिक्कत होती है और मोड़ पर अचानक बाधा आने से हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
⚠️ ‘सुंदरता’ के नाम पर खतरा
शहर के कई चौराहों पर बनाए गए सर्कल और डेकोरेटिव स्ट्रक्चर अब जानलेवा साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क डिजाइन में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, लेकिन यहां सौंदर्यीकरण के नाम पर मूलभूत नियमों की अनदेखी की गई है।
🚨 बढ़ते हादसों से लोगों में डर
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन चौराहों पर कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। खासकर रात के समय या तेज रफ्तार में वाहन चलाने वालों के लिए ये स्ट्रक्चर गंभीर खतरा बन जाते हैं।
🗣️ ‘महाभियान’ के जरिए उठी आवाज
‘पत्रिका’ द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य प्रशासन को जागरूक करना है। लोगों का कहना है कि एसी कमरों में बैठा प्रशासन जमीनी हकीकत से दूर है और समय रहते सुधार नहीं किया गया तो बड़े हादसे हो सकते हैं।
📌 सेफ्टी ऑडिट की मांग
शहरवासियों ने मांग की है कि तत्काल एक तकनीकी कमेटी गठित कर सभी चौराहों का सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। साथ ही जिन अधिकारियों की लापरवाही से यह स्थिति बनी है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
⚖️ जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जाए।

