राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने राज्य में लागू न्यूनतम मजदूरी दरों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि राजस्थान में मौजूदा मजदूरी दरें देश के कई प्रगतिशील राज्यों की तुलना में काफी कम हैं और इनमें तत्काल सुधार की जरूरत है।
गहलोत ने अपने बयान में कहा कि कम मजदूरी के कारण राज्य के श्रमिक वर्ग को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में वृद्धि करनी चाहिए, ताकि मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार समय-समय पर मजदूरी दरों में संशोधन किया जाता है, लेकिन राजस्थान में इस दिशा में अपेक्षित सुधार नहीं हुए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि न्यूनतम मजदूरी बढ़ाई जाती है तो इससे न केवल श्रमिकों को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उपभोग क्षमता में वृद्धि होगी।
इस मुद्दे को लेकर श्रमिक संगठनों ने भी लंबे समय से मांग उठाई है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए मजदूरी दरों को पुनः निर्धारित किया जाए।
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस विषय पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

