अंता विधानसभा उपचुनाव: भाजपा में मोरपाल सुमन के कारण बताओ नोटिस पर सियासी हलचल
राजस्थान की अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी मोरपाल सुमन को प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के बाद मामला अब अनुशासन समिति तक पहुँच गया है।
सूत्रों के अनुसार, मोरपाल सुमन को नोटिस किसी आंतरिक विवाद या अनुशासन उल्लंघन के संदर्भ में जारी किया गया था। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने इस मामले में स्पष्ट जवाब मांगा था, जिसे निर्धारित अवधि के भीतर सौंपना अनिवार्य था।
मोरपाल सुमन ने तीन दिन की अवधि के भीतर अपना लिखित जवाब प्रदेश अध्यक्ष को सौंप दिया है। पार्टी के अंदर इस मुद्दे को लेकर चर्चा और सियासी हलचल बढ़ गई है। अब अनुशासन समिति इस जवाब और मामले के सभी पहलुओं की समीक्षा कर निर्णय लेगी।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अनुशासन समिति का निर्णय उम्मीदवार के चुनावी स्थिति और पार्टी की छवि दोनों के लिए अहम होगा। वहीं पार्टी कार्यकर्ताओं में भी इस मामले को लेकर उत्सुकता और चर्चा बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंता विधानसभा उपचुनाव के दौरान इस तरह के आंतरिक विवाद पार्टी की चुनावी रणनीति और कार्यकर्ता मनोबल पर असर डाल सकते हैं। इसलिए पार्टी नेतृत्व अब मामले को संगठित और संवेदनशील ढंग से निपटाने की कोशिश कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि अंता उपचुनाव को लेकर भाजपा और प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच सियासी तैयारियां चरम पर हैं। मोरपाल सुमन के नोटिस और अनुशासन समिति की कार्रवाई का चुनावी नतीजों पर असर भी देखा जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, समिति के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मोरपाल सुमन उम्मीदवारी के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं या फिर कोई आंतरिक बदलाव या विकल्प अपनाना पड़ेगा।

