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जैसलमेर में शिक्षकों की कमी से नाराज छात्रों ने स्कूल गेट पर लगाया ताला, ग्रामीणों ने की पद भरने की मांग

जैसलमेर में शिक्षकों की कमी से नाराज छात्रों ने स्कूल गेट पर लगाया ताला, ग्रामीणों ने की पद भरने की मांग

जिले के भणियाणा क्षेत्र स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दूधली नाड़ी में शिक्षकों की कमी को लेकर शुक्रवार को छात्रों और ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। नाराज विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कक्षा 12वीं तक संचालित इस विद्यालय में शिक्षकों के 19 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में कई पद खाली पड़े हुए हैं। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और खासकर बोर्ड कक्षाओं के छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

छात्रों और ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इसके चलते मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगाने के बाद बड़ी संख्या में छात्र और ग्रामीण मौके पर जुट गए। उन्होंने शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि यह विद्यालय आसपास के कई गांवों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई का स्तर प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं।प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने छात्रों और ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझा और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया।

वहीं, प्रदर्शन कर रहे लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में समय-समय पर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खाली पदों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ता है। फिलहाल दूधली नाड़ी स्कूल में छात्रों और ग्रामीणों का विरोध जारी है। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की ओर है कि रिक्त पदों को भरने के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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