अमायरा सुसाइड केस: चार्जशीट पर परिजनों ने उठाए सवाल, वीडियो में देंखे स्कूल प्रबंधन पर भी सख्त धाराएं जोड़ने की मांग; कोर्ट आज सुना सकता है फैसला
चर्चित अमायरा सुसाइड केस में सोमवार को जयपुर महानगर प्रथम की एसीजेएम-10 कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मृत बच्ची के परिजनों की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो गईं। अब अदालत इस मामले में मंगलवार को अपना फैसला सुना सकती है। परिजनों ने पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट (चालान) पर गंभीर सवाल उठाते हुए मांग की है कि केवल क्लास टीचर ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल के खिलाफ भी बच्चे के प्रति क्रूरता (Cruelty to Child) से संबंधित धाराएं लगाई जाएं। साथ ही सभी आरोपियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा भी जोड़ने की मांग की गई है।
परिजनों ने चार्जशीट को बताया अधूरी
सुनवाई के दौरान परिजनों की ओर से अधिवक्ता अमित शर्मा ने अदालत में कहा कि पुलिस ने अपनी जांच में केवल क्लास टीचर के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा 47 के तहत आरोपों को प्रमाणित माना है।उन्होंने दलील दी कि मामले में स्कूल के प्रिंसिपल और प्रबंधन की भूमिका भी समान रूप से जिम्मेदार है, इसलिए उनके खिलाफ भी बच्चों के प्रति क्रूरता से संबंधित आरोप लगाए जाने चाहिए।अधिवक्ता ने यह भी कहा कि पुलिस ने चार्जशीट में किसी भी आरोपी के खिलाफ बच्ची को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप प्रमाणित नहीं माना है। परिजनों का आग्रह है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अदालत इस संबंध में भी उचित धाराएं जोड़ने का आदेश दे।
स्कूल प्रबंधन ने किया विरोध
वहीं, स्कूल प्रबंधन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक राज बाजवा ने परिजनों की मांग का विरोध किया।उन्होंने अदालत में कहा कि प्रसंज्ञान (Cognizance) के चरण में अदालत इस प्रकार की प्रक्रिया नहीं अपना सकती। उनका तर्क था कि आरोपों में नई धाराएं जोड़ने या हटाने का अधिकार मुकदमे के चार्ज तय होने (Charge Framing) के चरण में प्रयोग किया जाता है, न कि प्रसंज्ञान की अवस्था में।
आज आ सकता है कोर्ट का फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब उम्मीद है कि मंगलवार को कोर्ट यह तय करेगा कि पुलिस की चार्जशीट यथावत स्वीकार की जाए या परिजनों की मांग के अनुसार अतिरिक्त धाराएं जोड़ने पर विचार किया जाए।
मामले पर बनी हुई है नजर
अमायरा सुसाइड केस को लेकर शुरुआत से ही प्रदेशभर में चर्चा रही है। अब अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि मुकदमे की आगे की सुनवाई किन आरोपों और धाराओं के तहत आगे बढ़ेगी। यदि अदालत परिजनों की मांग स्वीकार करती है, तो मामले की कानूनी दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है।

