राजस्थान के बीकानेर जिले में खेजड़ी के संरक्षण को लेकर चल रहे ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ में गुरुवार, 5 फरवरी, 2026 को नया मोड़ आया। करीब 500 पर्यावरण प्रेमी अनशन पर बैठे थे, और इस मौके पर राजस्थान सरकार के मंत्री केके विश्नोई अनशन स्थल पर पहुंचे।
मंत्री विश्नोई ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिया कि सरकार खेजड़ी की रक्षा के लिए लिखित आश्वासन देगी। उन्होंने मंच से कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार मां अमृता देवी के बलिदान को याद करती है और उनकी विरासत तथा पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को कभी झुकने नहीं दिया जाएगा।
खेजड़ी, राजस्थान का राज्य वृक्ष, सूखी भूमि और मरुस्थलीय पारिस्थितिकी में जीवनदायिनी वृक्ष के रूप में जाना जाता है। इसे बचाने के लिए स्थानीय जनता और पर्यावरण प्रेमी पिछले कई दिनों से आंदोलनरत हैं।
इस मौके पर जब खेजड़ी और अमृता देवी की चर्चा राज्यभर में हो रही है, याद दिलाना जरूरी है कि अमृता देवी राजस्थान की वह शख्सियत थीं जिन्होंने अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों की रक्षा के लिए दिया। अमृता देवी का यह बलिदान देशभर के पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुका है।
हमें याद रखना चाहिए कि वृक्षों और पर्यावरण की रक्षा केवल कानून या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है। खेजड़ी बचाओ आंदोलन में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच हुए इस संवाद ने यह संदेश दिया कि संयुक्त प्रयास और सामाजिक जागरूकता से पर्यावरण की रक्षा संभव है।
यह आंदोलन न केवल बीकानेर, बल्कि पूरे राजस्थान में प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का प्रतीक बन चुका है। इसी संदर्भ में हमारी वेबसाइट पर 2 अप्रैल 2025 को प्रकाशित लेख में भी अमृता देवी के योगदान और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया था।

