Samachar Nama
×

आमेर किला जयपुर, राजस्थान की शान, वीडियो में जाने राजपूत-मुगल स्थापत्य का अद्भुत संगम

आमेर किला जयपुर, राजस्थान की शान, वीडियो में जाने राजपूत-मुगल स्थापत्य का अद्भुत संगम

राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 11 किलोमीटर दूर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित आमेर किला राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक दुर्गों में शामिल है। बलुआ पत्थर और संगमरमर से बना यह विशाल किला अपनी भव्यता, मजबूत प्राचीर, राजमहलों और शानदार नक्काशी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसे अंबर किला भी कहा जाता है।

राजा मान सिंह ने करवाया था निर्माण

आमेर किले का वर्तमान स्वरूप मुख्य रूप से राजा मान सिंह प्रथम के शासनकाल से जुड़ा है। उन्होंने 16वीं शताब्दी के अंत में किले के निर्माण और विस्तार का काम शुरू कराया था। बाद में मिर्जा राजा जय सिंह प्रथम और सवाई जय सिंह द्वितीय सहित अन्य शासकों ने इसमें कई निर्माण और बदलाव कराए।आमेर लंबे समय तक कछवाहा राजपूत शासकों की राजधानी रहा। बाद में सवाई जय सिंह द्वितीय ने जयपुर शहर की स्थापना की और राजधानी को आमेर से जयपुर स्थानांतरित किया।

राजपूत और मुगल वास्तुकला का संगम

आमेर किले की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी वास्तुकला शामिल है। किले में राजपूत शैली के साथ मुगल स्थापत्य का प्रभाव भी दिखाई देता है। लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का इस्तेमाल इसकी खूबसूरती को और बढ़ाता है।किले के भीतर विशाल दरवाजे, आंगन, महल, मंदिर और बगीचे बनाए गए हैं। ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण किले से आसपास की अरावली पहाड़ियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

शीश महल है सबसे खास

आमेर किले का शीश महल पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है। इसकी दीवारों और छत पर छोटे-छोटे शीशों और सजावटी कांच का खूबसूरत काम किया गया है।कहा जाता है कि रोशनी पड़ने पर शीश महल की सजावट बेहद आकर्षक दिखाई देती थी। इसकी बारीक कारीगरी उस समय के कलाकारों की उच्च स्तर की शिल्पकला को दर्शाती है।

गणेश पोल और दीवान-ए-आम

किले का गणेश पोल बेहद सुंदर प्रवेश द्वारों में गिना जाता है। इस पर की गई रंगीन सजावट और नक्काशी राजस्थानी वास्तुकला की खास पहचान है।इसके अलावा किले में दीवान-ए-आम भी है, जहां राजा प्रजा और दरबारियों से मुलाकात करते थे। किले के अलग-अलग हिस्से राजपरिवार के निजी जीवन और राजकीय गतिविधियों की झलक दिखाते हैं।

मां शिला देवी का मंदिर

आमेर किले के भीतर शिला देवी मंदिर भी स्थित है। यह कछवाहा राजपूत राजपरिवार की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मंदिर माना जाता है। मंदिर में देवी की पूजा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

माओटा झील का खूबसूरत नजारा

आमेर किले के नीचे माओटा झील स्थित है। झील के पानी में किले और आसपास की पहाड़ियों का प्रतिबिंब बेहद आकर्षक दिखाई देता है। ऐतिहासिक रूप से यह झील आमेर के लिए जल स्रोत के रूप में भी महत्वपूर्ण रही है।

यूनेस्को विश्व धरोहर का हिस्सा

आमेर किला 2013 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए गए ‘हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान’ का हिस्सा है। राजस्थान के अन्य ऐतिहासिक पहाड़ी किलों के साथ इसे भी इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता के कारण वैश्विक विरासत का दर्जा मिला।

पर्यटन का प्रमुख केंद्र

आज आमेर किला जयपुर आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण है। किले की विशाल दीवारें, राजमहल, मंदिर, शीश महल और आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसे राजस्थान के सबसे खास पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं।आमेर किला सिर्फ एक दुर्ग नहीं, बल्कि राजस्थान के राजपूत इतिहास, शाही जीवनशैली और स्थापत्य कला की जीवंत कहानी है। इसकी ऊंची दीवारों और भव्य महलों में आज भी जयपुर के शाही अतीत की झलक देखी जा सकती है।

Share this story

Tags