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पुलिस पर लापरवाही के आरोप, पीड़ित परिवार न्याय की राह में दर-दर की ठोकरें खा रहा

पुलिस पर लापरवाही के आरोप, पीड़ित परिवार न्याय की राह में दर-दर की ठोकरें खा रहा

राजस्थान के करौली जिले से एक चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां एक पीड़ित परिवार न्याय की मांग लेकर दर-दर भटक रहा है, लेकिन उन्हें कानूनी सहायता और सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। मामला केवल मारपीट का नहीं, बल्कि एक महिला की गरिमा और पूरे परिवार के वजूद से जुड़ा हुआ है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने अपने दायित्व का सही पालन नहीं किया। उन्होंने बताया कि आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बावजूद, पुलिस की ओर से सख्त कार्रवाई नहीं की गई और आरोपियों को कानूनी ढाल मिल गई। परिवार का कहना है कि इससे उन्हें न्याय नहीं मिला और उनकी सुरक्षा पर भी खतरा बना हुआ है।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि मामला न केवल शारीरिक उत्पीड़न का है, बल्कि इसमें मानसिक और सामाजिक दबाव भी शामिल है। उन्होंने कहा कि घटना के बाद समाज और प्रशासन की ओर से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, जिससे उनका जीवन कठिन और असुरक्षित बन गया है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पीड़ित परिवार ने कई बार थाने और अधिकारियों के पास न्याय की गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें लंबित कार्रवाई और आश्वासन के अलावा कोई ठोस कदम नहीं मिला। इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून और प्रशासनिक तंत्र में सुधार की सख्त जरूरत है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में पुलिस की त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई बहुत जरूरी है। यदि पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं लेती, तो पीड़ित परिवार को न केवल मानसिक तनाव बढ़ता है, बल्कि समाज में असुरक्षा और असंतोष भी फैलता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि पीड़ितों को हर स्तर पर सुरक्षा और न्याय मिले, और आरोपी बिना किसी छूट के कानून के सामने पेश हों।

इस मामले ने स्थानीय लोगों में भी चिंता पैदा कर दी है। ग्रामीण और नागरिकों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन की लापरवाही से अपराधियों को मनोबल मिलता है और आम जनता में न्याय के प्रति विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने सरकार और उच्च अधिकारियों से अपील की है कि इस तरह के मामलों में तुरंत और कड़ा कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में पीड़ित परिवार को कानूनी सहायता और संरक्षण प्रदान करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और पुलिस समय पर और सही कार्रवाई करें, तो न केवल पीड़ितों को न्याय मिलेगा, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।

करौली का यह मामला यह संदेश देता है कि न्याय और सुरक्षा प्रणाली में खामियों के कारण पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ता है। प्रशासन और पुलिस पर यह जिम्मेदारी है कि वे कानून का सही पालन करें और पीड़ितों को न्याय दिलाने में कोई कसर न छोड़ें।

पीड़ित परिवार ने अब उच्च अधिकारियों और मीडिया की मदद लेकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि उनके परिवार की गरिमा और न्याय उनकी प्राथमिकता है और वे इसे पाने तक पीछे नहीं हटेंगे।

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