अजमेर में स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के दीवान सैयद जैनुल आबेदीन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि ईरान और भारत के संबंध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से गहरे और मजबूत रहे हैं, ऐसे में मौजूदा वैश्विक तनाव की स्थिति में भारत को कूटनीतिक पहल करनी चाहिए।
दीवान सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा कि भारत सदियों से सूफी परंपरा, भाईचारे और अमन के पैगाम के लिए दुनिया में जाना जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की छवि एक शांतिप्रिय और संवाद समर्थक देश की रही है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में उसे शांति बहाली की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
संवाद ही समाधान का रास्ता
दीवान ने अपने बयान में कहा कि यदि वैश्विक शक्तियां टकराव की राह छोड़कर बातचीत और कूटनीतिक संवाद को प्राथमिकता दें, तो हालात को सुधारा जा सकता है। उनका मानना है कि संघर्ष किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय और वैश्विक अस्थिरता बढ़ती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं। ऐसे में भारत को अपनी ऐतिहासिक भूमिका को ध्यान में रखते हुए शांति और संतुलन का संदेश देना चाहिए।
सूफी परंपरा का संदेश
दीवान ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज की शिक्षाएं प्रेम, करुणा और सहअस्तित्व पर आधारित हैं। आज की वैश्विक परिस्थितियों में इन्हीं मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय समझदारी और संयम से काम लेगा।
अजमेर से आया यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम पर दुनिया की नजर टिकी हुई है। दीवान के इस वक्तव्य को शांति और कूटनीतिक समाधान की अपील के रूप में देखा जा रहा है।

