एयर चीफ एपी सिंह ने तेजस में भरी करियर की आखिरी उड़ान: 31 अक्टूबर को होंगे रिटायर, ‘तरंग शक्ति’ युद्धाभ्यास में लिया हिस्सा
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में अपने करियर की आखिरी फाइटर उड़ान भरी। यह उड़ान राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ के दौरान हुई। एपी सिंह 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनकी इस उड़ान के साथ एक फाइटर पायलट के रूप में उनके लंबे करियर का महत्वपूर्ण अध्याय पूरा हो गया।
स्वदेशी तेजस में भरी आखिरी उड़ान
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 12 अक्टूबर को तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट में उड़ान भरी। यह तेजस के शुरुआती संस्करण एलसीए एमके-1 की उड़ान थी। भारतीय वायुसेना के अनुसार, इस दौरान उन्होंने मित्र देशों के विमानों और सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के साथ भी उड़ान भरी।
वायुसेना ने इस अवसर को उनके उड़ान के प्रति जुनून और देश की सेवा के प्रति समर्पण से जुड़ा खास पल बताया। एपी सिंह का सैन्य करियर लंबे समय तक लड़ाकू विमानों और वायुसेना की परिचालन क्षमताओं से जुड़ा रहा है।
31 अक्टूबर को रिटायर होंगे एपी सिंह
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। केंद्र सरकार ने एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को अगला वायुसेना प्रमुख नियुक्त किया है। वह 31 अक्टूबर की दोपहर से नए पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जोधपुर में हुआ ‘तरंग शक्ति 2026’ का आयोजन
बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ का आयोजन 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर किया गया। इसका मुख्य विषय ‘पावर इन पार्टनरशिप’ यानी साझेदारी में शक्ति था। इस अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका की वायुसेनाओं ने हिस्सा लिया। इसके अलावा 32 देशों के प्रतिनिधियों ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया।
इस अभ्यास का उद्देश्य अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, संयुक्त अभियानों का अभ्यास करना और एक-दूसरे के परिचालन अनुभवों से सीखना था। अभ्यास के दौरान भारतीय और विदेशी विमानों ने संयुक्त उड़ानें और हवाई अभ्यास किए।
तेजस के जरिए स्वदेशी रक्षा क्षमता पर भी नजर
एपी सिंह की आखिरी फाइटर उड़ान के दौरान स्वदेशी तेजस विमान भी चर्चा में रहा। तेजस भारत में विकसित हल्का लड़ाकू विमान है, जिसे वायुसेना की परिचालन क्षमता में महत्वपूर्ण माना जाता है। अभ्यास में विभिन्न देशों के आधुनिक लड़ाकू विमानों की मौजूदगी ने भी ध्यान खींचा।
एयर चीफ की इस उड़ान ने उनके पायलट करियर के एक अहम पड़ाव को चिह्नित किया। हालांकि, 31 अक्टूबर को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी देश की सेवा का उनका अनुभव और योगदान भारतीय वायुसेना की विरासत का हिस्सा बना रहेगा।

