IAS शिखर अग्रवाल के 40 विला-कॉटेज खरीदने के मामले में ACB की एंट्री, वीडियो में जाने प्राथमिक जांच शुरू; पहले हो चुके हैं APO
राजस्थान में आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों की ओर से एक ही कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदने के मामले में अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जांच शुरू कर दी है। एसीबी ने इस मामले में प्राथमिक इंक्वायरी (PE) दर्ज की है। राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।शिखर अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। एसीबी अब मामले से जुड़े तथ्यों, लेन-देन और कथित लाभ पहुंचाने के आरोपों की पड़ताल करेगी।
29 अक्टूबर की रात सरकार ने किया था APO
इस मामले को लेकर विवाद सामने आने के बाद राजस्थान सरकार ने 29 अक्टूबर की आधी रात को आईएएस शिखर अग्रवाल को उनके सभी पदों से हटाकर एपीओ कर दिया था। इसके बाद मामले में जांच की मांग और तेज हो गई थी।अब एसीबी की ओर से प्राथमिक जांच दर्ज किए जाने के बाद अधिकारी और संबंधित कंपनी के बीच हुए कथित लेन-देन की जांच का रास्ता खुल गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि विला और कॉटेज की खरीद किस प्रक्रिया के तहत हुई और क्या इस दौरान किसी तरह के पद के दुरुपयोग या नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है।
ACB डीजी ने मुख्य सचिव से की थी मुलाकात
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने शुक्रवार सुबह मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों और जांच प्रक्रिया को लेकर चर्चा हुई।मुख्य सचिव ने इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की थी। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि एसीबी डीजी के साथ मुलाकात कर भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को अमलीजामा पहनाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बीच जांच शुरू
राज्य सरकार की ओर से भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया जा रहा है। इसी बीच शिखर अग्रवाल से जुड़े मामले में एसीबी की प्राथमिक जांच शुरू होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।फिलहाल जांच प्राथमिक स्तर पर है। एसीबी की पड़ताल में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यह भी स्पष्ट होगा कि विला और कॉटेज की खरीद में किसी सरकारी पद या प्रभाव का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। जांच पूरी होने से पहले आरोपों को साबित हुआ नहीं माना जा सकता।

