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होली पर आस्था का अद्भुत संगम, सीकर से श्रद्धालुओं की दंडवत यात्रा जलती सिगड़ी के साथ रामदेवरा पहुंची

होली पर आस्था का अद्भुत संगम, सीकर से श्रद्धालुओं की दंडवत यात्रा जलती सिगड़ी के साथ रामदेवरा पहुंची

रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर राजस्थान की लोक संस्कृति और अटूट आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। सीकर से करीब 50 श्रद्धालुओं का एक दल दंडवत यात्रा करते हुए प्रसिद्ध तीर्थ स्थल रामदेवरा मंदिर पहुंचा। इस यात्रा की सबसे विशेष और आकर्षक बात यह रही कि श्रद्धालु पूरे रास्ते जलती हुई सिगड़ी अपने साथ लेकर चले।

बताया जा रहा है कि यह दल कई दिनों पूर्व सीकर से रवाना हुआ था। श्रद्धालु एक-एक दंडवत करते हुए कठिन मार्ग को पार कर रहे थे। इस दौरान वे अपने साथ एक सिगड़ी में अग्नि प्रज्वलित रखे हुए थे, जिसे बिना बुझाए रामदेवरा तक पहुंचाया गया। रास्ते भर यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल और आस्था का केंद्र बना रहा।

अग्नि के साथ अटूट विश्वास

श्रद्धालुओं का मानना है कि जलती सिगड़ी उनकी श्रद्धा, संकल्प और विश्वास का प्रतीक है। यात्रा के दौरान सिगड़ी की अग्नि को लगातार जलाए रखना आसान नहीं था, लेकिन श्रद्धालुओं ने पूरी सावधानी और समर्पण के साथ इस परंपरा का निर्वहन किया। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर यात्रियों का स्वागत भी किया।

दंडवत यात्रा स्वयं में बेहद कठिन मानी जाती है, क्योंकि इसमें श्रद्धालु एक-एक दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते हैं। ऐसे में जलती सिगड़ी को साथ लेकर चलना इस तपस्या को और भी चुनौतीपूर्ण बना देता है।

होली पर विशेष महत्व

होली के अवसर पर इस प्रकार की यात्राएं लोक आस्था का प्रतीक मानी जाती हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा रामदेव के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा है और मनोकामना पूर्ण होने पर वे इस प्रकार की कठिन यात्रा का संकल्प लेते हैं। रामदेवरा पहुंचने के बाद सभी श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।

इस अनूठी दंडवत यात्रा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राजस्थान की धरती पर आस्था और परंपराएं आज भी पूरी जीवंतता के साथ निभाई जा रही हैं। जलती सिगड़ी के साथ की गई यह यात्रा श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण बन गई।

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