Samachar Nama
×

ब्यावर में 5 व्यापारियों की अनूठी पहल, 400 बुजुर्गों का बना सहारा; 26 साल में कभी बाजार नहीं पहुंची चंदे की रसीद

ब्यावर में 5 व्यापारियों की अनूठी पहल, 400 बुजुर्गों का बना सहारा; 26 साल में कभी बाजार नहीं पहुंची चंदे की रसीद

राजस्थान के ब्यावर में पांच व्यापारियों की पहल पिछले 26 साल से बुजुर्गों के लिए सहारे का ठिकाना बनी हुई है। इन व्यापारियों ने मिलकर ऐसी व्यवस्था शुरू की, जिससे करीब 400 बुजुर्गों को आश्रय और मदद मिल रही है। खास बात यह है कि इस पहल को चलाने के लिए बाजार में चंदा मांगने की जरूरत नहीं पड़ी और न ही पिछले 26 साल में चंदे की रसीद लेकर व्यापारियों के पास पहुंचने की नौबत आई।

समाज में जरूरतमंदों की मदद के लिए कई लोग व्यक्तिगत स्तर पर योगदान देते हैं, लेकिन लंबे समय तक किसी सेवा को जारी रखना अपने आप में बड़ी चुनौती है। ब्यावर के इन पांच व्यापारियों की पहल इसी वजह से चर्चा में है। उनकी कोशिश ने बुजुर्गों की देखभाल और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की मिसाल पेश की है।

पांच व्यापारियों ने शुरू की पहल

इस व्यवस्था की शुरुआत पांच व्यापारियों ने मिलकर की थी। उनका उद्देश्य बुजुर्गों को ऐसा ठिकाना उपलब्ध कराना था, जहां उन्हें जरूरत के समय सहारा मिल सके। समय के साथ यह पहल आगे बढ़ी और इससे करीब 400 बुजुर्गों को जुड़ाव या सहायता मिलने की जानकारी सामने आई है।

इस तरह की सामाजिक पहल में आर्थिक संसाधनों के साथ-साथ नियमित प्रबंधन और सेवा की भावना भी महत्वपूर्ण होती है। व्यापारियों ने मिलकर जिस काम की शुरुआत की, उसका लंबे समय तक जारी रहना स्थानीय समाज में सहयोग की भूमिका को सामने लाता है।

26 साल में चंदे की रसीद लेकर नहीं पहुंचे

इस पहल की सबसे खास बात इसका आर्थिक प्रबंधन बताया जा रहा है। दावा है कि बीते 26 वर्षों में चंदा मांगने के लिए बाजार में रसीद लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ी। यानी इस सेवा को जारी रखने के लिए सार्वजनिक रूप से चंदा जुटाने की परंपरागत व्यवस्था पर निर्भरता नहीं रही।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि इस पूरी व्यवस्था का खर्च किस स्रोत से पूरा किया जाता है, पांचों व्यापारियों ने किस तरह जिम्मेदारियां बांटीं और बुजुर्गों को किस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इन पहलुओं की जानकारी मिलने पर इस मॉडल को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

समाज के लिए बनी प्रेरणा

बुजुर्गों को आश्रय और सहायता देना सामाजिक सुरक्षा का अहम हिस्सा है। उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों को देखभाल, साथ और दैनिक जरूरतों के लिए मदद की आवश्यकता होती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर शुरू की गई पहल उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

ब्यावर के पांच व्यापारियों की यह पहल बताती है कि सामूहिक प्रयास और निरंतरता से समाज के जरूरतमंद वर्ग के लिए लंबे समय तक काम किया जा सकता है। 26 वर्षों से जारी इस प्रयास और करीब 400 बुजुर्गों से जुड़े इसके दायरे ने इसे चर्चा का विषय बनाया है।

Share this story

Tags