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राजस्थान में साइबर ठगी का बड़ा मामला, 83 वर्षीय महिला से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए ठगी व समझौते का आरोप

राजस्थान में साइबर ठगी का बड़ा मामला, 83 वर्षीय महिला से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए ठगी व समझौते का आरोप

राजस्थान में साइबर ठगी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 83 वर्षीय वृद्ध महिला को निशाना बनाए जाने का आरोप है। इस घटना ने एक बार फिर बुजुर्गों की सुरक्षा और साइबर अपराधों की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, पीड़िता के साथ करीब 80 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई थी। आरोप है कि इसके बाद पीड़िता को दबाव में लेकर 10 लाख रुपये में समझौता करने के लिए मजबूर किया गया। इस पूरे मामले ने डिजिटल ठगी के नए और खतरनाक तरीके “डिजिटल अरेस्ट” की भयावहता को उजागर किया है।

बताया जा रहा है कि साइबर अपराधियों ने वृद्ध महिला को मानसिक रूप से डराकर और दबाव में लेकर यह धोखाधड़ी की, जिससे वह लंबे समय तक असहज और भय की स्थिति में रहीं। इस तरह के मामलों में आमतौर पर अपराधी खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं।

इस मामले में Rajasthan High Court ने गंभीर रुख अपनाते हुए राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) और साइबर क्राइम एसपी को तलब किया है। अदालत ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और राज्य सरकार को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

Rajasthan Police Cyber Crime Branch की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, जिसके बाद पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी के इस नए पैटर्न को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

राज्य में हाल के महीनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों में तेजी देखी गई है, जिसमें खासकर बुजुर्ग और तकनीकी रूप से कम जागरूक लोग निशाने पर हैं। अपराधी उन्हें डराकर बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है और लोगों को किसी भी अज्ञात कॉल या वीडियो कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। फिलहाल अदालत के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच और तेज हो गई है और पुलिस को जल्द विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

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