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दो करोड़ पैंसठ लाख का ठेका…काम कहां हो रहा, किसी को नहीं पता

दो करोड़ पैंसठ लाख का ठेका…काम कहांदो करोड़ पैंसठ लाख का ठेका…काम कहां हो रहा, किसी को नहीं पता हो रहा, किसी को नहीं पता

राजस्थान में सरकारी कामकाज की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपये का ठेका जारी होने के बावजूद जमीन पर काम का कोई अता-पता नहीं है। मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है, वहीं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, यह ठेका किसी विकास कार्य—संभवत: सड़क निर्माण, जल निकासी या अन्य बुनियादी सुविधा—के लिए जारी किया गया था। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो किसी तरह का निर्माण कार्य दिखाई दे रहा है और न ही किसी एजेंसी की मौजूदगी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें इस परियोजना के बारे में सिर्फ कागजों में ही जानकारी मिली है, हकीकत में कोई काम नहीं हुआ।

ग्रामीणों का आरोप है कि ठेके की राशि तो जारी हो गई, लेकिन काम शुरू करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि काम हुआ है, तो वह कहां और किस रूप में हुआ—इसकी जानकारी किसी को नहीं दी गई। इससे पूरे मामले में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को उठाया है और जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, यह भी जरूरी है कि जनता को यह बताया जाए कि आखिर इस परियोजना की वास्तविक स्थिति क्या है।

प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले में स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। अधिकारियों का कहना है कि वे मामले की जानकारी जुटा रहे हैं और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी। हालांकि, इस तरह के जवाब से लोगों का भरोसा बहाल होता नजर नहीं आ रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निगरानी की कमी ही मुख्य समस्या है। यदि समय-समय पर परियोजनाओं की समीक्षा की जाए और प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता है।

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में आम जनता तक पहुंच रहा है या नहीं। फिलहाल, स्थानीय लोग यही सवाल पूछ रहे हैं—जब 2 करोड़ 65 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, तो काम आखिर कहां हो रहा है?

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं। तब तक यह मुद्दा जनता के बीच चर्चा का विषय बना रहेगा।

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