Ajmer के गरीब नवाज में आज चढ़ेगा 810वें उर्स का झंडा, पहाड़ी से दागे जाएंगे तोप के गोले
अजमेर न्यूज़ डेस्क, ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 810वें उर्स का झंडा शनिवार को दरगाह के बुलंद दरवाजे पर चढ़ाया जाएगा। साथ ही उर्स की अनौपचारिक शुरूआत हो जाएगी। भीलवाड़ा का गौरी परिवार झंडा चढ़ाने के लिए यहां पहुंच गया है। परंपरा के अनुसार शाम 5 बजे बाद दरगाह गेस्ट हाउस से झंडे को सैयद मारूफ चिश्ती की सदारत में जुलूस के रूप में ले जाया जाएगा। सूफियाना कलाम और बैंड वादन होगा।
बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोप के गोले दागे जाएंगे। रोशनी के वक्त से पूर्व झंडे को बुलंद दरवाजे पर चढ़ाया जाएगा। इधर, गौरी परिवार के सदस्य अकीदत का नजराना पेश करने के लिए आस्ताना शरीफ पहुंचेंगे। अंजुमन सचिव सैयद वाहिद हुसैन अंगाराशाह ने बताया कि शनिवार को मजार शरीफ की खिदमत दोपहर की बजाए शाम को होगी।
उर्स के मौके पर जन्नती दरवाजा 2 फरवरी को खोला जाएगा। यदि रजब का चांद हो गया तो उर्स की रसूमात रात से ही शुरू हो जाएगी। अन्यथा 3 फरवरी की रात से उर्स की रस्मों की शुरुआत होगी।
मौरूसी अमले के सदस्य उस्मान घड़ियाली को दरगाह कमेटी ने उनका हुजरा वापस दे दिया है। शुक्रवार को कमेटी के कार्मिकों ने इस हुजरे की सील चपड़ी हटाई। कमेटी कार्मिकों ने बुलंद दरवाजे के नीचे स्थित उस्मान घड़ियाली का हुजरा खोला। घड़ियाली ने इसके लिए कमेटी सदर अमीन पठान का आभार व्यक्त किया है। लंबे समय से विवाद के चलते यह हुजरा कमेटी ने बंद कर रखा था। अब आपसी सहमति से इसे खोला गया है।
ख्वाजा गरीब नवाज के 810वें उर्स के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा विश्रामस्थली पर तैयारियां शुरू कर दी गई है। दरगाह कमेटी के उपाध्यक्ष मुनव्वर खान और सदस्य सपात खान ने शुक्रवार को कार्यों का जायजा लिया। मुनव्वर खान ने बताया की कमेटी का प्रयास रहेगा की कम से कम जायरीन उर्स में अजमेर आएं, लेकिन जो आ गए हैं उन्हें विश्रामस्थली पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। जिला प्रशासन और दरगाह कमेटी का प्रयास रहेगा कि जायरीन को कोविड उपर्युक्त व्यवहार की पालना करवाते हुए कोविड के प्रति जागरूक किया जाए। इस अवसर प्रभारी शफीक खान उपस्थित रहे।
सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के दान पत्रों से 10 लाख रुपए से अधिक की रकम निकली है। शुक्रवार को दान पत्र खोले गए। ख्वाजा साहब के उर्स के झंडे की रस्म से एक दिन पूर्व ये दान पात्र खोले गए हैं। दरगाह कमेटी के सदस्य सपात खान की अगुवाई में कमेटी कार्मिकों ने परिसर में लगे 16 दान पात्रों में निकली राशि की गिनती की। इन दान पात्रों में 10.29 लाख और कुछ विदेशी मुद्रा भी प्राप्त हुई। इससे पूर्व 24 दिसंबर को दान पात्र खोले गए थे।
ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती का सालाना उर्स की अनौपचारिक शुरुआत दरगाह के बुलंद दरवाजे पर झंडा फहराने के साथ होती है। झंडे के जुलूस की शानो शौकत में चार चांद लगाने के लिए मिलिट्री, कभी सीआरपीएफ और कभी पुलिस के बैंड समय-समय पर आते रहे हैं। ये बैंड वादक सूफियाना कलाम की धुन पेश कर आशिकाने ख्वाजा का मन मोह लेते हैं। दरगाह में समय-समय पर चादर के जुलूस और अन्य आयोजनों पर सामान्य बैंड वादक ही आते हैं, लेकिन सालाना उर्स के झंडे के जुलूस में सरकारी बैंड वादक अपना कलाम पेश कर अकीदत का इजहार करते हैं।
मुतवल्ली परिवार से जुड़े सैयद रऊफ चिश्ती बताते हैं कि 1944 से यानी आजादी से पहले ही झंडे की रस्म में सरकारी बैंड वादक ही आते रहे हैं। इसके लिए बाकायदा उनके पास लाइसेंस भी मौजूद हैं। बैंड वालों के साथ ही तोप दागने की अनुमति भी मिली हुई है। झंडे के जुलूस के दौरान बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोप के गोले दागे जाते हैं।
सैयद रऊफ चिश्ती बताते हैं कि 1996 तक मिलिट्री और सीआरपीएफ के मशक बैंड के कलाकार झंडे के जुलूस के दौरान अपनी कला का प्रदर्शन करते थे। जायरीन भी बहुत खुश होते थे, लेकिन अब मशक बैंड खत्म हो गया है। ऐसे में अब सीआरपीएफ व पुलिस के सामान्य बैंड ही जुलूस में आते हैं।
राजस्थान न्यूज़ डेस्क !!!

