राजस्थान के सरिस्का बाघ अभयारण्य से सोमवार (2 फरवरी) को बुरी खबर सामने आई। यहां एक 6 वर्षीय बाघिन ST-28 की टेरिटोरियल फाइट के दौरान मृत्यु हो गई। वन अधिकारियों के अनुसार, बाघिन के शरीर पर करीब आठ गंभीर घाव पाए गए।
सरिस्का के क्षेत्रीय निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने बताया कि यह घटना बाघ परियोजना सरिस्का के अकबरपुर रेंज नाका, पृथ्वीपुरा बीट डाबली के वन क्षेत्र में हुई। उन्होंने बताया कि बाघिन की मौत क्षेत्रीय टेरिटोरियल संघर्ष के कारण हुई, जो कि बाघों के प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है। बाघ अपने क्षेत्र की रक्षा और अधिकार बनाए रखने के लिए अक्सर ऐसे टकराव में शामिल हो जाते हैं, और कभी-कभी इन झड़पों में गंभीर चोटें भी लग जाती हैं।
बाघिन ST-28 की मृत्यु के बाद NTCA (National Tiger Conservation Authority) की गाइडलाइन के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि बाघिन का अंतिम संस्कार वन्यजीवन संरक्षण मानकों और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किया गया, ताकि यह घटनास्थल और बाघ समुदाय पर न्यूनतम प्रभाव डाले।
सरिस्का बाघ परियोजना के विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं प्राकृतिक संघर्ष का हिस्सा हैं और बाघों के क्षेत्रीय अधिकार और प्रजनन व्यवहार को प्रभावित करती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नियमित कैमराट्रैप निगरानी और GPS कॉलर के माध्यम से बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। इससे घायल बाघों की पहचान और समय पर मदद सुनिश्चित की जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना दर्शाती है कि बाघों के लिए क्षेत्रीय संघर्ष सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन बाघों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए निगरानी और अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बाघों के प्राकृतिक व्यवहार को समझें और अभयारण्य के भीतर किसी भी तरह के हस्तक्षेप से बचें।
सरिस्का बाघ अभयारण्य में पहले भी बाघों की मृत्यु प्राकृतिक कारणों, टेरिटोरियल फाइट या मानव हस्तक्षेप के कारण हो चुकी है। वन विभाग लगातार संख्या वृद्धि, स्वास्थ्य और संरक्षण पर नजर रख रहा है। इस घटना के बावजूद सरिस्का में बाघों की संख्या स्थिर बनी हुई है, और परियोजना निरंतर जंगल और बाघ संरक्षण के लिए काम कर रही है।

