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बबर मगरा क्षेत्र में आए दिन बिन बादल बारिश, जल-जाल में फंस रहे 4 हजार बाशिंदे
 

बबर मगरा क्षेत्र में आए दिन बिन बादल बारिश, जल-जाल में फंस रहे 4 हजार बाशिंदे

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए सरकार द्वारा जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत पर भारी बजट खर्च किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई स्थानों पर मरम्मत कार्य पूरा होने के कुछ ही समय बाद फिर से भवनों में दरारें, छत से पानी रिसाव और अन्य खामियां सामने आने की शिकायतें मिल रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, राज्य में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई सरकारी विद्यालयों की हालत लंबे समय से खराब थी, जिन्हें सुधारने के लिए विशेष मरम्मत योजना के तहत करोड़ों रुपये का बजट जारी किया गया है। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं बताई जा रही है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई स्कूल भवनों की मरम्मत में ठेकेदारों द्वारा मानकों की अनदेखी किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, कार्य की निगरानी और समयसीमा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ मामलों में तो मरम्मत कार्य पूरा होने के कुछ महीनों के भीतर ही फिर से संरचनात्मक समस्याएं देखने को मिली हैं।

इस मुद्दे पर स्थानीय अभिभावकों और शिक्षकों ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता, लेकिन कई स्कूलों में छत टपकने और दीवारों की जर्जर स्थिति के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि मरम्मत कार्य की स्वतंत्र जांच कराई जाए और लापरवाह ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बजट जारी करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सही निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है। यदि निर्माण कार्य में पारदर्शिता और तकनीकी निरीक्षण को मजबूत किया जाए तो इस तरह की समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जिलों से रिपोर्ट तलब की है और सभी निर्माण कार्यों की समीक्षा के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जिन स्थानों पर अनियमितताएं पाई जाएंगी, वहां जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है, जहां कई स्कूल भवन अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं और बच्चों को अस्थायी कक्षाओं में पढ़ाई करनी पड़ रही है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।

कुल मिलाकर, जर्जर स्कूलों की मरम्मत पर भारी खर्च के बावजूद उठ रहे सवाल यह संकेत देते हैं कि व्यवस्था में सुधार की जरूरत अब भी बनी हुई है। यदि समय रहते गुणवत्ता और निगरानी पर ध्यान नहीं दिया गया तो इस तरह की योजनाओं का अपेक्षित लाभ बच्चों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाएगा।

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