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पिता की मौत के 21 साल बाद बेटे को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, वीडियो में जाने राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

पिता की मौत के 21 साल बाद बेटे को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, वीडियो में जाने राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पिता की मौत के करीब 21 साल बाद उनके बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस एसपी शर्मा और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने उमेश सिंह की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।हाईकोर्ट ने सेंट्रल इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, पिलानी को निर्देश दिया है कि वह उमेश सिंह को तत्काल प्रभाव से अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करे। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी कारणों के आधार पर किसी पात्र व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से अनुकंपा नियुक्ति की योजना का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।

21 साल बाद भी अदालत ने माना हक

मामले में उमेश सिंह ने अपने पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। मामला लंबे समय तक विभिन्न स्तरों पर चलता रहा और नियुक्ति नहीं मिल सकी। इसके बाद उमेश सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपनी अपील के माध्यम से नियुक्ति दिए जाने की मांग की।मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति के उद्देश्य और परिवार की परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि ऐसी नियुक्ति का उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक संकट से उबरने में मदद करना है। इसलिए केवल तकनीकी आधार बताकर नियुक्ति से इनकार करना इस योजना की भावना के अनुरूप नहीं है।

तकनीकी आधार पर नियुक्ति से इनकार नहीं

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के मामले में तकनीकी कारणों को नियुक्ति से इनकार का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। खास तौर पर तब, जब संबंधित परिवार की परिस्थितियां यह दर्शाती हों कि उसे सहायता की आवश्यकता है।हाईकोर्ट ने माना कि अनुकंपा नियुक्ति की योजना का मुख्य उद्देश्य मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार को आर्थिक सहारा देना है। यदि प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी पहलुओं के कारण पात्र व्यक्ति को राहत नहीं मिलती है तो योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होता है।

परिवार की स्थिति को माना महत्वपूर्ण

अदालत ने मामले में परिवार की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा। अदालत की टिप्पणी से स्पष्ट है कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में केवल प्रक्रिया या तकनीकी पहलुओं पर ध्यान देने के बजाय योजना के मूल उद्देश्य और प्रभावित परिवार की स्थिति को भी देखा जाना चाहिए।हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सेंट्रल इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, पिलानी को उमेश सिंह की नियुक्ति की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से पूरी करनी होगी। इस फैसले को लंबे समय से अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार कर रहे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अदालत का यह फैसला इस बात पर जोर देता है कि कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को वास्तविक राहत पहुंचाना भी है। ऐसे में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में तकनीकी अड़चनों के कारण पात्र लोगों को राहत से वंचित करने पर अदालत की यह टिप्पणी भविष्य के मामलों में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

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