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'सतलुज' विवाद गहराया: फुटेज में जाने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने मेकर्स से मांगे सबूत, फिल्म पर प्रतिबंध बरकरार

'सतलुज' विवाद गहराया: फुटेज में जाने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने मेकर्स से मांगे सबूत, फिल्म पर प्रतिबंध बरकरार

पंजाबी अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म के निर्माताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि वे फिल्म में किए गए दावों के समर्थन में ठोस दस्तावेजी और आधिकारिक साक्ष्य सार्वजनिक करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दावों को प्रमाणित नहीं किया गया तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि फिल्म में लगभग 25 हजार लापता या कथित रूप से अवैध तरीके से दाह संस्कार किए गए लोगों का उल्लेख किया गया है। उनके अनुसार, यदि निर्माता इस दावे के समर्थन में आधिकारिक रिकॉर्ड और विश्वसनीय दस्तावेज पेश कर देते हैं, तो वह सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए तैयार हैं। लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है, तो फिल्म निर्माताओं को अपने दावों की जवाबदेही तय करनी होगी।

फिल्म पर प्रतिबंध बरकरार

विवाद के बीच फिल्म 'सतलुज' पर लगा प्रतिबंध जारी है। रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 की ग्लोबल कैटेगरी से भी हटा दिया गया है। इसके बाद अब यह फिल्म विदेशों में भी स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध नहीं रहेगी।

केंद्रीय समिति ने भी दी प्रतिबंध जारी रखने की सिफारिश

फिल्म के कंटेंट की जांच के लिए गठित केंद्रीय समिति ने अपनी समीक्षा पूरी कर ली है। सूत्रों के अनुसार, समिति ने सिफारिश की है कि फिल्म पर लगा प्रतिबंध फिलहाल जारी रखा जाए। समिति का मानना है कि फिल्म की विषयवस्तु और उसमें किए गए कुछ दावों की संवेदनशीलता को देखते हुए मौजूदा निर्णय में बदलाव उचित नहीं होगा।

विवाद के केंद्र में फिल्म की विषयवस्तु

फिल्म 'सतलुज' की कहानी और उसमें दिखाए गए कुछ ऐतिहासिक एवं सामाजिक संदर्भ विवाद का मुख्य कारण बने हुए हैं। एक पक्ष का कहना है कि फिल्म ऐतिहासिक घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करती है, जबकि दूसरे पक्ष का आरोप है कि इसमें बिना पर्याप्त साक्ष्य के गंभीर दावे किए गए हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

फिलहाल इस पूरे मामले पर सभी की नजर सरकार, जांच समिति और फिल्म निर्माताओं की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि निर्माता अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं या मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो विवाद नया मोड़ ले सकता है। तब तक फिल्म पर लगा प्रतिबंध यथावत रहने की संभावना है।

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