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पंजाब कांग्रेस में फिर उठी कलह की चिंगारी: रंधावा की ‘Unity is Strength’ पोस्ट से नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज, राजा वडिंग के खिलाफ लामबंदी!

पंजाब कांग्रेस में फिर उठी कलह की चिंगारी: रंधावा की ‘Unity is Strength’ पोस्ट से नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज, राजा वडिंग के खिलाफ लामबंदी!

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आने लगी है। गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में सोशल मीडिया पर “Unity is Strength” पोस्ट साझा कर पार्टी के भीतर नेतृत्व बदलाव की चर्चाओं को हवा दे दी है। रंधावा की इस पोस्ट के बाद पंजाब कांग्रेस की सियासत में हलचल तेज हो गई है और इसे प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के खिलाफ चल रही नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, रंधावा और चन्नी गुट ने कथित तौर पर यह फैसला लिया है कि जब तक राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया नहीं जाता, तब तक वे पार्टी के उन कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगे, जहां राजा वडिंग बतौर प्रदेश अध्यक्ष मौजूद रहेंगे। इस फैसले के बाद कांग्रेस के भीतर गुटबाजी की चर्चा और तेज हो गई है।

दरअसल, पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से संगठन और नेतृत्व को लेकर मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि प्रदेश संगठन को मजबूत करने के लिए नेतृत्व में बदलाव की जरूरत है। वहीं, राजा वडिंग समर्थक नेताओं का कहना है कि मौजूदा नेतृत्व पार्टी को मजबूती देने के लिए काम कर रहा है और बदलाव की मांग उचित नहीं है।

सुखजिंदर सिंह रंधावा की पोस्ट को राजनीतिक जानकारों द्वारा एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी नेता का नाम लेकर विरोध नहीं किया, लेकिन चन्नी के समर्थन में एकजुटता का संदेश देना पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को उजागर करता है।

चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब कांग्रेस के प्रमुख दलित चेहरों में शामिल हैं और मुख्यमंत्री पद पर भी रह चुके हैं। ऐसे में उनके समर्थन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एकजुट होना कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में अहम माना जा रहा है। दूसरी ओर, राजा वडिंग पंजाब कांग्रेस संगठन को संभालने की कोशिश कर रहे हैं और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर सक्रिय हैं।

पार्टी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हाईकमान पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। पंजाब में नेताओं के बीच बढ़ती दूरी को कम करने के लिए जल्द ही वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत की जा सकती है। हालांकि अभी तक कांग्रेस आलाकमान की ओर से प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान अगर जल्द नहीं सुलझी तो इसका असर पार्टी की चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। गुटबाजी और आपसी मतभेद पहले भी कांग्रेस के लिए चुनौती रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी नेताओं को साथ लेकर चलने और संगठन में एकजुटता बनाए रखने की होगी।

फिलहाल रंधावा की पोस्ट के बाद पंजाब कांग्रेस की सियासत गर्मा गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी हाईकमान इस विवाद को कैसे संभालता है और क्या प्रदेश नेतृत्व में कोई बड़ा बदलाव किया जाता है या नहीं।

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