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पंजाब कांग्रेस में सुलह के संकेत, भूपेश बघेल से मिलने को तैयार हुए चरणजीत चन्नी; वीडियो में देंखे हाईकमान ने दिया स्पष्ट संदेश

पंजाब कांग्रेस में सुलह के संकेत, भूपेश बघेल से मिलने को तैयार हुए चरणजीत चन्नी; वीडियो में देंखे हाईकमान ने दिया स्पष्ट संदेश

पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच सुलह के संकेत दिखाई देने लगे हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी आखिरकार पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल से मुलाकात के लिए तैयार हो गए हैं। बघेल के पंजाब दौरे के पांचवें दिन चन्नी ने स्पष्ट किया कि वह पार्टी प्रभारी से मुलाकात करेंगे।

इससे पहले भूपेश बघेल ने कहा था कि चन्नी ने उनसे मिलने के लिए कोई समय नहीं मांगा था। उन्होंने बताया कि जब उनकी चन्नी से बातचीत हुई थी, तब चन्नी ने कहा था कि वह तीन दिनों के लिए राज्य से बाहर हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हो सकी थी।

अब पार्टी के भीतर जारी मतभेदों को दूर करने के लिए एक अहम बैठक आयोजित की जा रही है। भूपेश बघेल ने बताया कि यह बैठक विधायक राणा गुरजीत सिंह के चंडीगढ़ स्थित आवास पर होगी। इस बैठक में केवल तीन वरिष्ठ नेता—चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और राणा गुरजीत सिंह—शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक मुद्दों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी।

इससे पहले 10 जुलाई को प्रस्तावित बैठक को अंतिम समय में टाल दिया गया था। राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि चन्नी गुट की ओर से बैठक को लेकर दो प्रमुख शर्तें रखी गई थीं। पहली शर्त यह थी कि बैठक कांग्रेस भवन में न हो और दूसरी यह कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग बैठक में मौजूद न रहें। हालांकि, इन शर्तों पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके बाद बैठक स्थगित कर दी गई।

सूत्रों के अनुसार, इसके बाद पार्टी हाईकमान की ओर से चन्नी को स्पष्ट संदेश दिया गया कि वे राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रही संगठनात्मक प्रक्रिया पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकते। पार्टी नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी नेताओं की बात सुनी जाएगी, लेकिन संगठनात्मक फैसले हाईकमान के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही होंगे।

भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के अनुभव को देखते हुए इस बार पार्टी नेतृत्व ने किसी प्रकार का नेतृत्व परिवर्तन नहीं करने का फैसला लिया है। उनका संकेत था कि बार-बार नेतृत्व बदलने के बजाय संगठन को मजबूत करने और सभी नेताओं को साथ लेकर चलने पर जोर दिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चन्नी और बघेल की यह मुलाकात पंजाब कांग्रेस में जारी गुटबाजी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। आगामी चुनावों को देखते हुए पार्टी हाईकमान राज्य इकाई में एकजुटता कायम करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में इस बैठक से निकलने वाले निष्कर्षों पर पंजाब की राजनीति की नजर बनी हुई है।

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