पंजाब विधानसभा का E20 प्रस्ताव: इथेनॉल, फसलों और ग्रामीण बाजारों को लेकर बढ़ा नीतिगत टकराव
पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार की E20 नीति को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए अनुकूल न होने वाले पुराने वाहनों के लिए अनिवार्य E20 पेट्रोल के रोलआउट को रोकने और नीति की समीक्षा करने की मांग की है। 4 अगस्त 2026 को विधानसभा में पारित प्रस्ताव के बाद इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा सिर्फ वाहन मालिकों और ईंधन की कीमतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पंजाब की खेती, फसल विविधीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ गया है।
E20 का मतलब पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण है। केंद्र सरकार का तर्क है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटती है, विदेशी मुद्रा की बचत होती है और किसानों के लिए कृषि उत्पादों की अतिरिक्त मांग पैदा होती है। सरकार के अनुसार इथेनॉल कार्यक्रम ने अब तक बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बचाने के साथ कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी समर्थन दिया है।
लेकिन पंजाब विधानसभा में इस नीति को लेकर अलग तस्वीर सामने आई। राज्य के विधायकों ने चिंता जताई कि बड़ी संख्या में पुराने वाहन E20 के लिए डिजाइन या प्रमाणित नहीं हैं। ऐसे वाहनों में ईंधन की अनुकूलता, माइलेज और संभावित रखरखाव संबंधी समस्याओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विधानसभा ने मांग की है कि ऐसे वाहनों के लिए अनिवार्य E20 व्यवस्था तब तक रोकी जाए, जब तक उपभोक्ता सुरक्षा और वाहन अनुकूलता से जुड़े मुद्दों का पर्याप्त समाधान न हो।
दिलचस्प बात यह है कि पंजाब में E20 को लेकर किसानों और विधानसभा की चिंताएं एक-दूसरे से अलग दिखाई देती हैं। राज्य में इथेनॉल की बढ़ती मांग ने मक्का जैसी फसलों के लिए नया बाजार तैयार किया है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक पंजाब के कई किसान और मिलर्स E20 कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि इससे मक्का की मांग और कीमतों को सहारा मिला है। धान और गेहूं के पारंपरिक चक्र से बाहर निकलकर मक्का की खेती को बढ़ावा देने में इथेनॉल उद्योग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पंजाब की कृषि नीति में भी मक्का को धान के विकल्प के तौर पर बढ़ावा देने और उसे कॉर्न ऑयल या इथेनॉल में इस्तेमाल करने की संभावनाओं का उल्लेख किया गया है। राज्य के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फसल विविधीकरण के साथ भूजल पर दबाव कम करने और किसानों को वैकल्पिक बाजार उपलब्ध कराने की कोशिश लंबे समय से चल रही है।
यही वजह है कि E20 को लेकर पंजाब में नीतिगत टकराव बहुआयामी हो गया है। एक तरफ वाहन मालिकों के हित, ईंधन की गुणवत्ता और उपभोक्ता विकल्प का सवाल है, तो दूसरी तरफ मक्का उत्पादकों, डिस्टिलरी और ग्रामीण बाजारों को मिलने वाली मांग का मुद्दा है। केंद्र सरकार का कहना है कि खाद्य सुरक्षा प्रभावित किए बिना केवल निर्धारित अतिरिक्त या अधिशेष अनाज को ही इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
अब पंजाब का प्रस्ताव केंद्र और राज्य के बीच E20 नीति पर आगे की बहस का आधार बन सकता है। असली चुनौती यह होगी कि ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के लिए नए बाजार के फायदे बरकरार रखते हुए पुराने वाहन मालिकों और उपभोक्ताओं की चिंताओं का समाधान कैसे किया जाए।

