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नाम, शहर, भाषा और पिता तक बदला… 34 साल पहले हुई हत्या में मिला ऐसा सुराग, पकड़ा गया कातिल पति

नाम, शहर, भाषा और पिता तक बदला… 34 साल पहले हुई हत्या में मिला ऐसा सुराग, पकड़ा गया कातिल पति

कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। अपराधी कितना भी अंदर क्यों न छिप जाए, एक दिन सलाखों के पीछे पहुंच ही जाता है। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच (एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल) ने इस कहावत को सच साबित कर दिया है। पुलिस ने एक ऐसे भगोड़े को गिरफ्तार किया है जिसने 34 साल पहले अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी। अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने सरकारी कागज़ों पर न सिर्फ अपना नाम और शहर, बल्कि अपनी भाषा और अपने पिता का नाम भी बदल लिया था।

पूरी कहानी 15 मार्च 1992 को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पिलंगी गांव (अब सरोजिनी नगर थाना इलाके में) से शुरू हुई थी। सुबह करीब 7:15 बजे पुलिस को सूचना मिली कि योगेंद्र उर्फ ​​जोगिंदर सिंह नाम के एक आदमी ने अपनी पत्नी का गला घोंटकर हत्या कर दी है। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो योगेंद्र ने भागने की कोशिश की, लेकिन मकान मालिक के भाई की मदद से उसे पकड़ लिया गया। घर के अंदर उसकी पत्नी की लाश मिली, जिसकी आंख पर चोट के निशान थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला घोंटने से मौत की पुष्टि हुई।

उम्रकैद और पैरोल

मामला कोर्ट पहुंचा और 1997 में पटियाला हाउस कोर्ट ने योगेंद्र को उसकी पत्नी की हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई। लगभग तीन साल जेल में बिताने के बाद, योगेंद्र ने 2000 में दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की और उसे चार हफ़्ते की पैरोल मिल गई। रिहा होने के बाद, योगेंद्र ने इतना गायब होने का प्लान बनाया कि अगले 26 सालों तक वह पुलिस फाइलों में सिर्फ़ एक "भगोड़ा" बनकर रह गया।

अपनी पहचान छिपाने की एक बड़ी साज़िश

पैरोल से भागने के बाद, योगेंद्र ने अपनी पहचान पूरी तरह मिटाने का फ़ैसला किया। वह हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और कर्नाटक समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपता रहा। वह हर राज्य में दो या तीन साल तक रहता, और खतरा महसूस होने पर जगह बदल लेता।

2012 में, वह पंजाब के लुधियाना पहुंचा, जहां उसने अपनी सबसे बड़ी साज़िश रची।

नाम बदला: योगेंद्र से 'जोगिंदर सिंह'।

पिता का नाम बदला: उसने डॉक्यूमेंट्स में अपने पिता का नाम जयपाल से बदलकर 'जयप्रकाश' कर लिया।

एक नई भाषा सीखी: उसने पंजाबी सीखी और अब वह इसे अच्छे से बोलता है।

नए डॉक्यूमेंट्स: उसने लुधियाना के पते वाला नया आधार कार्ड और वोटर ID कार्ड भी बनवाया।

पेशा: शक से बचने के लिए, उसने वहां बढ़ई का काम करना शुरू कर दिया।

500 लोगों की जांच और 10 दिन की 'पब्लिसिटी'

क्राइम ब्रांच DCP संजीव कुमार यादव के मुताबिक, इंस्पेक्टर मंगेश त्यागी और रॉबिन त्यागी की टीम लगातार उसकी तलाश कर रही थी। हेड कांस्टेबल मिंटू यादव को जानकारी मिली कि आरोपी लुधियाना में हो सकता है। पुलिस ने मुजफ्फरनगर से लुधियाना तक करीब 500 लोगों के प्रोफाइल और रिकॉर्ड चेक किए।

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