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मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जालंधर में एससी विद्यार्थियों को वितरित की छात्रवृत्ति

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जालंधर में एससी विद्यार्थियों को वितरित की छात्रवृत्ति

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शुक्रवार को जालंधर के पी.ए.पी. ग्राउंड में एससी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति वितरित करने का समारोह आयोजित किया। इस अवसर पर उन्होंने राज्य के ढाई लाख से अधिक बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान करने की शुरुआत की, जिससे पिछड़े और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा की राह आसान होगी।

मुख्यमंत्री मान ने इस मौके पर कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना है। शिक्षा ही समाज और राष्ट्र के विकास की असली कुंजी है। इस योजना के माध्यम से हम सुनिश्चित करेंगे कि आर्थिक स्थिति किसी बच्चे की पढ़ाई में बाधा न बने।”

सीएम ने आगे कहा कि सरकार के प्रयास हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान किए जाएं और सभी बच्चों को उनके सामर्थ्य के अनुसार उच्च शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित हो। उन्होंने बताया कि छात्रवृत्ति का यह वितरण न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करेगा, बल्कि विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति प्रेरणा और उत्साह भी बढ़ाएगा।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। छात्रों ने खुशी जताते हुए कहा कि छात्रवृत्ति मिलने से उनके उच्च शिक्षा के सपनों को साकार करने में मदद मिलेगी। वहीं, अभिभावकों ने भी सरकार की इस पहल की सराहना की और कहा कि इससे उनकी आर्थिक चिंता कम होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की छात्रवृत्ति योजनाएं समाज के पिछड़े वर्ग के बच्चों को मुख्यधारा में लाने और शिक्षा के क्षेत्र में असमानता को कम करने का एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह पहल पंजाब सरकार की सामाजिक संवेदनशीलता और समान अवसर प्रदान करने की नीति का उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रवृत्ति के साथ-साथ सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने, स्कूलों और कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने और विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को न केवल आर्थिक सहायता मिले, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्राप्त हो।

सरकार ने बताया कि छात्रवृत्ति वितरण का यह कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा और धीरे-धीरे अधिक विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। इससे शिक्षा में भागीदारी बढ़ेगी और समाज में समान अवसर सुनिश्चित होंगे।

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