बाबा बर्फानी के दर्शन को जा रहे यात्रियों पर टूटा संकट! मकान पर गिरी यात्रियों से भरी बस, 39 लोग थे सवार
मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के गांदरबल ज़िले से बस दुर्घटना की खबर सामने आई है। मिली जानकारी के मुताबिक, गांदरबल के गुंड इलाके में 39 तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस पलट गई, जिसमें करीब 30 तीर्थयात्री घायल हो गए। वे अमरनाथ यात्रा से लौट रहे थे। सड़क के एक खतरनाक हिस्से पर बस बेकाबू हो गई और दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है।
दुर्घटना कैसे हुई?
गांदरबल में यह दुर्घटना तब हुई जब सड़क के एक खतरनाक हिस्से पर वाहन बेकाबू हो गया; बस सड़क से फिसलकर एक घर से टकरा गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना की खबर मिलते ही पुलिस, ITBP, CRPF, सेना के जवानों और स्थानीय लोगों ने सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए तुरंत बचाव अभियान शुरू किया; अब सभी की हालत स्थिर है। उन्होंने कहा कि ज़्यादातर लोगों को मामूली चोटें आई हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
उपराज्यपाल ने क्या कहा? तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस के पलटने की घटना पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा, "मैंने गांदरबल के डिप्टी कमिश्नर और स्वास्थ्य अधिकारियों से बात की और आज सुबह गांदरबल के गनीवन में हुई दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में घायल हुए श्री अमरनाथजी तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। बाबा बर्फानी के दर्शन करके लौट रहे 39 तीर्थयात्री घायल हुए हैं और फिलहाल SKIMS में उनका इलाज चल रहा है। मैंने स्वास्थ्य अधिकारियों को सभी ज़रूरी मदद और सर्वोत्तम संभव चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। मैं घायल तीर्थयात्रियों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करता हूं।"
अमरनाथ यात्रा कब तक चलेगी?
अमरनाथ यात्रा 2 जुलाई को शुरू हुई थी। यह यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी, यानी कुल 57 दिनों तक। खबरों के मुताबिक, अब तक 4.15 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के पवित्र धाम के दर्शन कर चुके हैं। गौरतलब है कि अमरनाथ गुफा जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह तीर्थयात्रा एक साथ दो रास्तों से शुरू होती है: अनंतनाग ज़िले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम रास्ता और गांदरबल ज़िले में 14 किलोमीटर लंबा बालटाल रास्ता, जिसमें ज़्यादा चढ़ाई करनी पड़ती है।

