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वीडियो! 9 लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गुंडिचा मंदिर पहुंचे तीनों रथ, मौसी के घर 9 दिन विराजेंगे भगवान

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ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में आयोजित विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का प्रमुख चरण शुक्रवार को पूर्ण हो गया। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के तीनों भव्य रथ शुक्रवार दोपहर गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। अब तीनों देवता अगले 9 दिनों तक गुंडिचा मंदिर, जिसे श्रद्धालु भगवान की मौसी का घर मानते हैं, में विराजमान रहेंगे। इसके साथ ही रथयात्रा का यह महत्वपूर्ण पड़ाव संपन्न हो गया।

रथयात्रा का दूसरा दिन शुक्रवार सुबह विधि-विधान के साथ शुरू हुआ। भारी बारिश, उमस और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। अनुमानित 9 लाख से अधिक श्रद्धालु ग्रैंड रोड पर एकत्र हुए और पूरे उत्साह के साथ भगवान के रथों को खींचने में शामिल हुए। "जय जगन्नाथ" के जयघोष से पूरा पुरी शहर भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया।

पहले दिन अधूरी रह गई थी यात्रा

गुरुवार को रथयात्रा की शुरुआत तो भव्य तरीके से हुई थी, लेकिन पाहंडी अनुष्ठान में हुई देरी और शाम ढलने के कारण तीनों रथ निर्धारित समय पर गुंडिचा मंदिर तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को पूरी रात अपने-अपने रथों पर ही विराजमान रहना पड़ा। शुक्रवार सुबह दोबारा यात्रा शुरू की गई और दोपहर तक तीनों रथ सफलतापूर्वक गुंडिचा मंदिर पहुंच गए।

पाहंडी अनुष्ठान में हुई देरी बनी वजह

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने बताया कि सभी धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित समय पर शुरू हुए थे, लेकिन भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा मुख्य द्वार पर लगभग 40 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी। इसी कारण पाहंडी अनुष्ठान तय समय से एक घंटे से अधिक देर से पूरा हुआ। इस देरी का असर पूरे कार्यक्रम पर पड़ा और रथ पहले दिन अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके।

बारिश भी नहीं डिगा सकी श्रद्धालुओं की आस्था

शुक्रवार को मौसम लगातार चुनौतीपूर्ण बना रहा। बारिश और उमस के बावजूद लाखों श्रद्धालु सुबह से ही ग्रैंड रोड पर पहुंच गए। भक्तों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान के रथों को रस्सियों से खींचा। सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही और प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए थे।

9 दिनों तक मौसी के घर रहेंगे भगवान

हिंदू मान्यता के अनुसार, रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर जाते हैं। यहां तीनों देवता पूरे 9 दिनों तक भक्तों को दर्शन देंगे। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन करेंगे। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद तीनों देवता भव्य "बहुदा यात्रा" के जरिए वापस श्री जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे।

पुरी की यह विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक भी मानी जाती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनने के लिए पुरी पहुंचते हैं और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं। इस बार भी भारी भीड़, उत्साह और भक्तिभाव के बीच रथयात्रा का यह महत्वपूर्ण चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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