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प्रशासन की अनदेखी के बाद ग्रामीणों ने दिखाई मिसाल, चंदा जुटाकर खुद बना डाली 3 किलोमीटर लंबी सड़क

प्रशासन की अनदेखी के बाद ग्रामीणों ने दिखाई मिसाल, चंदा जुटाकर खुद बना डाली 3 किलोमीटर लंबी सड़क

ओडिशा के Rourkela के नुआगांव ब्लॉक में ग्रामीणों ने आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की अनूठी मिसाल पेश की है। यहां 35 ग्रामीणों ने प्रशासन की लंबे समय तक चली उपेक्षा से परेशान होकर तीन साल से जर्जर पड़ी करीब 3 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण खुद ही कर डाला।

तीन साल से खराब थी सड़क

ग्रामीणों के अनुसार, गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला मार्ग लंबे समय से बदहाल स्थिति में था। बारिश के मौसम में सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता था, जिससे लोगों को आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजमर्रा के कामों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

स्थानीय लोगों ने कई बार संबंधित अधिकारियों और प्रशासन से सड़क की मरम्मत की मांग की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार इंतजार के बाद ग्रामीणों ने खुद पहल करने का फैसला लिया।

35 लोगों ने मिलकर जुटाया चंदा

सड़क निर्माण के लिए गांव के 35 लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया। ग्रामीणों ने न केवल आर्थिक योगदान दिया, बल्कि निर्माण कार्य में श्रमदान भी किया। सामूहिक प्रयास से सड़क की मरम्मत और निर्माण का काम पूरा किया गया, जिससे अब गांव के लोगों को राहत मिली है।

सामुदायिक एकता की बनी मिसाल

ग्रामीणों का यह कदम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकारी मदद नहीं मिली तो गांववासियों ने एकजुट होकर समस्या का समाधान स्वयं करने का निर्णय लिया। इस पहल ने सामुदायिक सहयोग और जनभागीदारी की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।

आवागमन हुआ आसान

नई सड़क बनने के बाद गांव के लोगों को आने-जाने में काफी सुविधा होने लगी है। बच्चों के स्कूल पहुंचने से लेकर मरीजों को अस्पताल ले जाने तक, सभी के लिए रास्ता पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुगम हो गया है।

प्रशासन पर उठे सवाल

इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर सड़क की मरम्मत कर दी जाती तो ग्रामीणों को खुद संसाधन जुटाकर यह काम नहीं करना पड़ता। वहीं, ग्रामीणों की पहल को सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक शक्ति का उदाहरण बताया जा रहा है।

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