Samachar Nama
×

न तो नीली, न ही गाय… फिर क्यों कहा जाता है ‘नीलगाय’? जानिए हैरान कर देने वाली सच्चाई

न तो नीली, न ही गाय… फिर क्यों कहा जाता है ‘नीलगाय’? जानिए हैरान कर देने वाली सच्चाई

इस धरती पर कई ऐसे जीव-जंतु पाए जाते हैं, जिनके बारे में हम जानते तो हैं, लेकिन उनकी असली पहचान से अनजान रहते हैं। समय-समय पर इन जीवों को लेकर कई दिलचस्प तथ्य सामने आते रहते हैं, जो लोगों को हैरान कर देते हैं। ऐसा ही एक जानवर है—नीलगाय, जिसके नाम को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है।

नीलगाय के बारे में आपने जरूर सुना होगा और संभव है कि आपने इसे देखा भी हो। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि न तो यह पूरी तरह नीली होती है और न ही यह असल में गाय है। फिर भी इसे ‘नीलगाय’ क्यों कहा जाता है? यही सवाल सोशल मीडिया पर भी अक्सर चर्चा का विषय बन जाता है।

दरअसल, नीलगाय एशिया की सबसे बड़ी एंटीलोप (मृग) प्रजाति है। इसका वैज्ञानिक नाम Boselaphus tragocamelus है। नर नीलगाय का रंग हल्का नीला-भूरा या स्लेटी होता है, जिसे दूर से देखने पर हल्का नीला आभास होता है। इसी वजह से इसके नाम में “नील” शब्द जोड़ा गया।

अब बात आती है “गाय” शब्द की। ग्रामीण इलाकों में यह जानवर आकार में बड़ा और शरीर की बनावट में कुछ हद तक गाय जैसा दिखता है। साथ ही, भारतीय समाज में गाय को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। इसी कारण लोगों ने इस जानवर को ‘गाय’ से जोड़कर “नीलगाय” कहना शुरू कर दिया, ताकि इसे नुकसान न पहुंचाया जाए और इसकी रक्षा हो सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि नीलगाय असल में गाय परिवार की नहीं, बल्कि एंटीलोप यानी हिरण जैसे जानवरों की श्रेणी में आती है। यह घास, पत्तियां और झाड़ियां खाती है और खुले मैदानों व जंगलों में पाई जाती है।

भारत के कई राज्यों में नीलगाय आसानी से देखी जा सकती है, खासकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में। हालांकि, कई जगहों पर यह किसानों के लिए परेशानी का कारण भी बन जाती है, क्योंकि यह फसलों को नुकसान पहुंचाती है।

फिलहाल, नीलगाय को लेकर यह दिलचस्प जानकारी सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है। यह एक बार फिर साबित करता है कि कई बार जो चीजें हमें सामान्य लगती हैं, उनके पीछे भी बेहद रोचक सच्चाई छिपी होती है।

Share this story

Tags