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मार्बल से लदे ओवरलोड वाहन बन रहे ‘मौत का बोझ’, सड़कों पर खतरे का बढ़ता साया

मार्बल से लदे ओवरलोड वाहन बन रहे ‘मौत का बोझ’, सड़कों पर खतरे का बढ़ता साया

जिले की सड़कों पर इन दिनों मार्बल से भरे ट्रक, ट्रेलर और डम्पर खुलेआम यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। क्षमता से कई गुना अधिक भार लेकर दौड़ते ये भारी वाहन न केवल सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं, बल्कि हर पल किसी बड़े और भयावह सड़क हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि खनन और परिवहन गतिविधियों से जुड़े ये वाहन निर्धारित भार सीमा का पालन नहीं कर रहे हैं। ओवरलोडिंग के कारण कई ट्रक और डम्पर असंतुलित होकर चल रहे हैं, जिससे अचानक पलटने या ब्रेक फेल होने की घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।

सूत्रों के अनुसार, मार्बल उद्योग से जुड़े परिवहन में लगे कुछ वाहन मालिक अधिक मुनाफे के लालच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। एक ही ट्रिप में अधिक माल ढोने के प्रयास में ये वाहन निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक भार लेकर सड़कों पर दौड़ते हैं, जिससे न केवल सड़कें खराब हो रही हैं बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ रही है।

राहगीरों ने बताया कि कई बार इन भारी वाहनों को तेज रफ्तार में शहर और ग्रामीण मार्गों से गुजरते देखा गया है। संकरी सड़कों पर ओवरलोड ट्रकों का संचालन आम लोगों के लिए डर का कारण बन गया है। खासकर स्कूल समय और बाजार के घंटों में इन वाहनों की आवाजाही से खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरलोडिंग न केवल सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनती है, बल्कि इससे वाहन की ब्रेकिंग क्षमता और नियंत्रण भी प्रभावित होता है। इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, जिसमें जान-माल का गंभीर नुकसान संभव है।

इसी बीच, प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर सख्ती की कमी के कारण ओवरलोडिंग पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। लोगों ने मांग की है कि ऐसे वाहनों पर नियमित चेकिंग अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाए।

परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही विशेष अभियान चलाकर ओवरलोड वाहनों की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सीमावर्ती खनन क्षेत्रों में निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।

फिलहाल, सड़कों पर दौड़ते ये ‘मौत का बोझ’ लोगों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े सड़क हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

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