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बड़ा गणपति फ्लायओवर का काम अब तक शुरू नहीं, मई में पूरी होनी थी डेडलाइन; विभागों के बीच तालमेल की कमी बनी वजह

बड़ा गणपति फ्लायओवर का काम अब तक शुरू नहीं, मई में पूरी होनी थी डेडलाइन; विभागों के बीच तालमेल की कमी बनी वजह

इंदौर के मध्य शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल बड़ा गणपति चौराहे पर प्रस्तावित फ्लायओवर का निर्माण तय समय के बावजूद आगे नहीं बढ़ सका है। स्थिति यह है कि जिस फ्लायओवर को मई 2026 तक पूरा किया जाना था, उसका निर्माण कार्य ही शुरू नहीं हो पाया। परियोजना में देरी के पीछे इंदौर विकास प्राधिकरण यानी आईडीए, नगर निगम और मेट्रो कॉर्पोरेशन के बीच समन्वय की कमी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, फ्लायओवर के लिए वर्क ऑर्डर पहले ही जारी किया जा चुका था और निर्माण की समय सीमा 18 महीने तय की गई थी।

पहले जरूरी लाइनों की शिफ्टिंग

बड़ा गणपति चौराहे के बीच से नर्मदा और ड्रेनेज की लाइनें गुजर रही हैं। फ्लायओवर का निर्माण शुरू करने से पहले इन लाइनों को दूसरी जगह शिफ्ट करना जरूरी है। इसके लिए नगर निगम को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन तय समय तक यह काम शुरू नहीं हो सका। रिपोर्ट के मुताबिक आईडीए ने लाइन शिफ्टिंग के लिए करीब 3 करोड़ रुपए की राशि भी उपलब्ध कराई थी।

लाइन शिफ्टिंग का काम होने के बाद ही फ्लायओवर निर्माण की मुख्य गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। इसी वजह से परियोजना की समयसीमा नजदीक आने के बावजूद मौके पर निर्माण की स्थिति आगे नहीं बढ़ पाई।

मेट्रो निर्माण ने भी बढ़ाई चुनौती

बड़ा गणपति चौराहे पर केवल फ्लायओवर ही नहीं, बल्कि मेट्रो से जुड़ा निर्माण कार्य भी प्रस्तावित है। चौराहे के आसपास अंडरग्राउंड मेट्रो और स्टेशन निर्माण की योजना के कारण निर्माण एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। एक ही स्थान पर अलग-अलग परियोजनाओं के काम होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने और लंबे समय तक जाम की स्थिति बनने की आशंका भी जताई गई थी।

ऐसे में फ्लायओवर निर्माण से पहले यह तय करना जरूरी है कि मेट्रो, ड्रेनेज, नर्मदा लाइन और सड़क निर्माण से जुड़े काम किस क्रम में किए जाएंगे। विभागों के बीच इसी समन्वय की कमी ने परियोजना की गति को प्रभावित किया है।

यातायात दबाव कम करने की थी योजना

बड़ा गणपति चौराहा मध्य शहर का महत्वपूर्ण और व्यस्त यातायात केंद्र है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। फ्लायओवर बनने के बाद मुख्य मार्ग पर यातायात को सुगम बनाने और जाम की समस्या कम करने की उम्मीद थी। परियोजना को लेकर आईडीए ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर वर्क ऑर्डर भी जारी किया था। रिपोर्ट के अनुसार फ्लायओवर की अनुमानित लागत करीब 23 करोड़ रुपए बताई गई है।

लेकिन निर्माण शुरू नहीं होने से अब परियोजना की समयसीमा पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि संबंधित विभागों के बीच जल्द समन्वय स्थापित नहीं हुआ तो फ्लायओवर का काम और लंबा खिंच सकता है।

अब आगे क्या होगा

परियोजना को गति देने के लिए आईडीए, नगर निगम और मेट्रो कॉर्पोरेशन को संयुक्त रूप से काम की प्राथमिकताएं तय करनी होंगी। सबसे पहले नर्मदा और ड्रेनेज लाइनों की शिफ्टिंग पूरी करनी होगी। इसके बाद मेट्रो निर्माण और फ्लायओवर के काम को इस तरह आगे बढ़ाना होगा कि एक परियोजना के कारण दूसरी परियोजना प्रभावित न हो।

बड़ा गणपति क्षेत्र में पहले से भारी यातायात रहता है। ऐसे में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद यातायात डायवर्जन की चुनौती भी सामने आएगी। इसलिए प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ लंबे समय से अटके फ्लायओवर निर्माण को गति देना और दूसरी तरफ निर्माण अवधि में आम लोगों को जाम से राहत दिलाने के लिए बेहतर ट्रैफिक प्लान तैयार करना।

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