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इंदौर में स्वाइन फ्लू से महिला की मौत, भोपाल में जांच को लेकर सवाल; एमपी में बढ़े H1N1 के मामले

इंदौर में स्वाइन फ्लू से महिला की मौत, भोपाल में जांच को लेकर सवाल; एमपी में बढ़े H1N1 के मामले

मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ रही है। इंदौर में हाल ही में एक महिला की मौत के बाद संक्रमण और इलाज की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे हैं। वहीं भोपाल में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बावजूद जांच को लेकर भी चर्चा है। राज्य में अब तक कई मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है और विशेषज्ञ लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दे रहे हैं।

इंदौर में सामने आए मामलों में एक करीब 60 से 62 वर्षीय महिला की मौत हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, महिला का इंदौर के निजी अस्पताल में करीब 16 दिन तक इलाज चला था। इसके बाद परिजन उन्हें मेडिकल सलाह के विरुद्ध अस्पताल से घर ले गए थे। अगले दिन उज्जैन में उनकी मौत हो गई। जांच में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई थी। मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल से मेडिकल रिकॉर्ड मांगे और जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम भी गठित की।

इंदौर में एक अन्य मरीज के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। मरीज को भर्ती कराने के लिए परिजनों को कई अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े। आखिरकार उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उपचार किया गया। सरकारी एमवाय अस्पताल में भी संदिग्ध और संक्रमित मरीजों के लिए विशेष वार्ड तैयार रखा गया है।

कब दवा की जरूरत और कब अस्पताल जाना जरूरी?

विशेषज्ञों के मुताबिक स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हो सकते हैं। इनमें तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और अत्यधिक कमजोरी शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

खास तौर पर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे मरीजों में डॉक्टर जरूरत के अनुसार एंटीवायरल दवा शुरू कर सकते हैं।

अगर मरीज को सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, लगातार बिगड़ती हालत या ऑक्सीजन स्तर कम होने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो घर पर इलाज करते रहने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर बुखार को स्वाइन फ्लू मानकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लगातार लक्षण बने रहने पर जांच और चिकित्सकीय सलाह में देरी भी नहीं करनी चाहिए। समय पर पहचान और उपचार से गंभीर स्थिति से बचने की संभावना बढ़ जाती है।

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