लंदन से लौटेगी मां वाग्देवी? भोजशाला विवाद, ब्रिटिश म्यूजियम से लेकर हाईकोर्ट फैसले तक पूरी कहानी
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक Bhojshala एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में आए हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब यह सवाल तेज हो गया है कि क्या मां वाग्देवी की प्रतिमा, जो वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में रखी है, वापस भारत लाई जाएगी।
यह पूरा विवाद राजा भोज के समय से जुड़ा माना जाता है, जिन्होंने 11वीं शताब्दी में इस स्थल को शिक्षा और संस्कृति के केंद्र के रूप में स्थापित किया था। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, इसे ‘सरस्वती सदन’ या भोजशाला कहा जाता था, जहां संस्कृत अध्ययन और विद्या का बड़ा केंद्र था।
मान्यता है कि यहां मां सरस्वती (वाग्देवी) की एक भव्य प्रतिमा स्थापित थी, जो बाद में खुदाई के दौरान मिली और ब्रिटिश काल में इंग्लैंड ले जाई गई। वर्तमान में यह प्रतिमा ब्रिटिश संग्रहालय (British Museum) में संरक्षित है।
ताजा घटनाक्रम में, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस स्थल को वाग्देवी/सरस्वती मंदिर के रूप में मान्यता दी है। इस फैसले के बाद अब प्रशासनिक और कूटनीतिक स्तर पर प्रतिमा को भारत वापस लाने की चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार और संबंधित विभाग अब इस दिशा में आगे की प्रक्रिया पर विचार कर रहे हैं।
हालांकि यह प्रक्रिया आसान नहीं मानी जा रही है, क्योंकि किसी भी ऐतिहासिक धरोहर को विदेश से वापस लाने के लिए कानूनी, कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना होता है। इसके लिए दोनों देशों के बीच बातचीत और दस्तावेजी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
इतिहासकारों के अनुसार, यह प्रतिमा न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। इसलिए इसका मुद्दा केवल आस्था नहीं बल्कि विरासत और इतिहास से भी जुड़ा हुआ है।
इसी बीच India में इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं और लोग इसे एक सांस्कृतिक पुनर्स्थापना के रूप में देख रहे हैं।

