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पन्ना में छठे दिन भी जारी जल सत्याग्रह, केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी और किसान पानी में खड़े होकर कर रहे प्रदर्शन

पन्ना में छठे दिन भी जारी जल सत्याग्रह, केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी और किसान पानी में खड़े होकर कर रहे प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित कई विकास परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी और किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। विस्थापित परिवारों का जल सत्याग्रह गुरुवार को छठे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी उफनती नदी के बीच पानी में खड़े होकर सरकार से उचित मुआवजा और बेहतर पुनर्वास व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

नदी के बीच पानी में खड़े होकर जताया विरोध

जानकारी के मुताबिक, केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी और किसान जल सत्याग्रह कर रहे हैं। आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर नदी के गहरे पानी में उतर गए हैं और लगातार सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजनाओं के कारण उनकी जमीन, घर और आजीविका प्रभावित हुई है, लेकिन उन्हें अभी तक उनकी अपेक्षा के अनुसार मुआवजा और पुनर्वास सुविधाएं नहीं मिली हैं।

विस्थापितों की मुख्य मांगें

आंदोलन कर रहे किसानों और आदिवासी परिवारों की प्रमुख मांग उचित मुआवजा, जमीन के बदले जमीन और प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक पुनर्वास है। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए उन्होंने अपनी जमीन दी, लेकिन बदले में उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलीं।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई परिवार अब भी विस्थापन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। रोजगार, आवास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी उनकी चिंताएं बनी हुई हैं।

प्रशासन की नजर आंदोलन पर

जल सत्याग्रह के छठे दिन भी प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। नदी में लगातार पानी बढ़ने के कारण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। प्रशासन की ओर से आंदोलनकारियों से बातचीत के प्रयास किए जाने की बात सामने आई है।

हालांकि, विस्थापित परिवार अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर अधिकारियों के सामने गुहार लगा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया।

परियोजनाओं से प्रभावित हैं कई परिवार

केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत अन्य परियोजनाओं को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इनसे प्रभावित होने वाले परिवार लंबे समय से मुआवजे और पुनर्वास की मांग उठा रहे हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि विकास के नाम पर प्रभावित लोगों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती।

फिलहाल पन्ना जिले में जारी जल सत्याग्रह प्रशासन और सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब देखना होगा कि विस्थापितों की मांगों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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