वीडियो में देखें! छतरपुर में आदिवासी घरों पर गरजा बुलडोजर, ग्रामीणों ने खून से लथपथ परिवार का बनाया वीडियो, एसपी कलेक्टर बोले खून नहीं, कलर
छतरपुर के दौधन गांव में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने के दौरान बुधवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। Ken-Betwa Link Project से जुड़े इस अभियान में प्रशासनिक टीम द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप और प्रशासनिक खंडन दोनों सामने आए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम ने एक आदिवासी परिवार के मकान पर जेसीबी और बुलडोजर चलाया, जबकि परिवार कथित रूप से घर के अंदर मौजूद था। आरोप है कि अचानक की गई इस कार्रवाई के दौरान मलबे में दबने से पति-पत्नी और दो बच्चे घायल हो गए। घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर इकट्ठा हो गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान पर्याप्त चेतावनी नहीं दी गई, जिससे यह हादसा हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही और अमानवीय व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आने की बात कही जा रही है, जिससे विवाद और बढ़ गया है।
हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। छतरपुर कलेक्टर Parth Jaiswal और पुलिस अधीक्षक Rajat Saklecha ने स्पष्ट किया है कि घटनाक्रम को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार न तो किसी ग्रामीण और न ही किसी अधिकारी या कर्मचारी के घायल होने की पुष्टि हुई है।
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों द्वारा विरोध किया गया और कथित रूप से प्रशासनिक वाहनों में तोड़फोड़ भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोगों को टूटे हुए मकान के पास लेटाकर गलत तरीके से स्थिति को प्रस्तुत किया गया है, जिसकी जांच की जा रही है।
कलेक्टर और एसपी ने यह भी कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या गलत व्यवहार पाया गया तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और प्रशासन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि केन-बेतवा परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने का काम नियमानुसार जारी रहेगा, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्राथमिकता है।
कुल मिलाकर यह मामला अब दो अलग-अलग दावों में बंट गया है—एक तरफ ग्रामीणों के गंभीर आरोप, और दूसरी तरफ प्रशासन का स्पष्ट खंडन—जिसकी सच्चाई जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेगी।

