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ट्रेनों में वेटिंग, बसों में मनमानी: पुणे-मुंबई रूट पर किराया 4 हजार तक पहुंचा, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

ट्रेनों में वेटिंग, बसों में मनमानी: पुणे-मुंबई रूट पर किराया 4 हजार तक पहुंचा, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

त्योहारी सीजन और यात्रियों की बढ़ती भीड़ के बीच ट्रेन और बसों में सफर करना लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट के कारण यात्रियों को मजबूरी में निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसका फायदा उठाते हुए कई निजी बस ऑपरेटरों ने किराए में भारी बढ़ोतरी कर दी है। पुणे-मुंबई जैसे व्यस्त रूट पर जहां सामान्य दिनों में बस किराया करीब 1200 रुपए तक रहता था, वहीं अब कई यात्रियों से 4000 रुपए तक किराया वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

यात्रियों का कहना है कि ट्रेन टिकट उपलब्ध नहीं होने और तत्काल टिकट में भी सीमित सीटों के कारण उन्हें निजी बसों पर निर्भर होना पड़ रहा है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ ऑपरेटर मनमाना किराया मांग रहे हैं।

ट्रेनों में बढ़ी वेटिंग, यात्रियों के सामने विकल्प कम

पुणे-मुंबई रूट देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग नौकरी, व्यापार और अन्य कामों के लिए दोनों शहरों के बीच यात्रा करते हैं। भीड़ बढ़ने के कारण कई ट्रेनों में सीट उपलब्ध नहीं है और वेटिंग टिकट भी काफी लंबी हो गई है।

रेलवे यात्रियों को अतिरिक्त ट्रेनों और विशेष व्यवस्थाओं के जरिए राहत देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मांग के मुकाबले सीटों की संख्या कम होने से यात्रियों की परेशानी बनी हुई है।

निजी बस संचालकों पर मनमानी का आरोप

ट्रेन में सीट नहीं मिलने के बाद यात्रियों को निजी बसों का विकल्प चुनना पड़ रहा है। यात्रियों का आरोप है कि कुछ बस संचालक बढ़ी हुई मांग को देखते हुए किराए में कई गुना बढ़ोतरी कर रहे हैं।

सामान्य दिनों में जिस रूट पर 1000 से 1200 रुपए तक किराया लिया जाता था, वहीं अब कुछ बसों में यही सफर 3000 से 4000 रुपए तक पहुंच गया है। यात्रियों ने प्रशासन से ऐसे ऑपरेटरों पर कार्रवाई की मांग की है।

यात्रियों ने जताई नाराजगी

यात्रियों का कहना है कि अचानक किराया बढ़ने से परिवार के साथ यात्रा करने वालों का बजट बिगड़ रहा है। खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और मध्यम वर्गीय परिवारों को इसका ज्यादा असर झेलना पड़ रहा है।

कुछ यात्रियों ने सोशल मीडिया पर भी बढ़े हुए किराए को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में यात्रा करने वाले लोगों के पास अधिक किराया देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों और छुट्टियों के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ना सामान्य है, लेकिन किराए में अनियंत्रित बढ़ोतरी को रोकने के लिए निगरानी जरूरी है। यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निजी बस ऑपरेटरों के किराए और नियमों की जांच की जानी चाहिए।

फिलहाल ट्रेनों में बढ़ती वेटिंग और निजी बसों के महंगे किराए ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में भीड़ और बढ़ने की संभावना के बीच यात्रियों को राहत देने के लिए रेलवे और परिवहन विभाग के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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