मिर्च की फसल पर वायरस का प्रकोप, पत्तियां सिकुड़ीं तो किसानों ने उखाड़े पौधे; उत्पादन घटने से दोहरा नुकसान
राजपुर क्षेत्र में मिर्च की फसल पर वायरस के प्रकोप से किसान परेशान हैं। खेतों में मिर्च के पौधों की पत्तियां सिकुड़ने और फसल की बढ़वार प्रभावित होने के बाद उत्पादन में गिरावट आने लगी है। बीमारी तेजी से फैलने की आशंका के चलते कई किसानों ने प्रभावित पौधों को खेत से उखाड़कर बाहर कर दिया है। किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए किए गए खर्च के बावजूद उत्पादन नहीं मिल पा रहा, जिससे उन्हें दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों के अनुसार मिर्च की फसल में शुरुआत में पौधों की पत्तियों में बदलाव दिखाई दिया। पत्तियां सिकुड़ने लगीं और पौधों की सामान्य बढ़वार प्रभावित होने लगी। धीरे-धीरे इसका असर फसल पर भी दिखाई देने लगा। जिन पौधों से अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, उनमें फल कम लगने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
खेतों से उखाड़े संक्रमित पौधे
वायरस के प्रकोप को देखते हुए किसानों ने प्रभावित पौधों को खेतों से निकालना शुरू कर दिया है। किसानों का मानना है कि संक्रमित पौधों को खेत में छोड़ने से बीमारी अन्य पौधों तक भी फैल सकती है। इसी वजह से कई जगह किसान अपनी फसल को बचाने के लिए संक्रमित पौधों को उखाड़ रहे हैं।
हालांकि पौधे उखाड़ने के बाद भी किसानों की समस्या कम नहीं हुई है। फसल में पहले ही लागत लग चुकी है और अब पौधे हटाने के कारण उत्पादन में और कमी आ रही है। किसानों का कहना है कि बीमारी की वजह से एक तरफ पैदावार घट रही है, वहीं दूसरी ओर दवा और फसल प्रबंधन पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
उत्पादन घटने से बढ़ी चिंता
मिर्च की फसल से अच्छी आय की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के लिए वायरस का प्रकोप बड़ा झटका माना जा रहा है। फसल की बढ़वार प्रभावित होने के कारण पौधों पर अपेक्षित मात्रा में मिर्च नहीं लग रही है। इससे बाजार में बेचने के लिए उपलब्ध उत्पादन कम होने की आशंका है।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते बीमारी की रोकथाम नहीं हुई तो बड़े क्षेत्र में फसल प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कृषि विभाग से खेतों का निरीक्षण कराने और बीमारी की सही पहचान कर उचित सलाह देने की मांग की है।
विशेषज्ञों की सलाह जरूरी
मिर्च की फसल में पत्तियों का सिकुड़ना कई प्रकार के रोगों या कीटों से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में किसानों के लिए बीमारी की सही पहचान बेहद जरूरी है। बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी दवा का इस्तेमाल करने के बजाय कृषि विशेषज्ञों से फसल की जांच कराना बेहतर माना जाता है।
किसानों को सलाह दी जाती है कि संक्रमित पौधों को अलग करें और खेत में स्वच्छता का ध्यान रखें। साथ ही खेत में आने वाले कीटों की निगरानी करें, क्योंकि कुछ वायरस रोगों का प्रसार कीटों के माध्यम से भी हो सकता है।
राजपुर क्षेत्र के किसान अब प्रशासन और कृषि विभाग से राहत और तकनीकी मार्गदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि समय रहते बीमारी पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो मिर्च की फसल से होने वाली आय पर गंभीर असर पड़ सकता है और उनकी लागत भी मुश्किल से निकल पाएगी।

