गोवा में पेड़ों के कचरे के निस्तारण की तकनीक सीखेंगे उज्जैन के पार्षद, लकड़ी से कोयला और पत्तों से खाद बनाने की प्रक्रिया का करेंगे अध्ययन
उज्जैन नगर निगम के सात पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल शहर में पेड़ों से निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से गोवा दौरे पर गया है। यह दल वहां ऐसे प्लांट का निरीक्षण करेगा, जहां पेड़ों की लकड़ी से कोयला (चारकोल) और सूखे पत्तों व अन्य जैविक अवशेषों से खाद तैयार की जाती है।
नगर निगम के अनुसार शहर के विभिन्न उद्यानों से नियमित रूप से बड़ी मात्रा में पेड़ों की छंटाई से निकलने वाली लकड़ी, टहनियां और पत्तियां एकत्र होती हैं। इसके अलावा सड़क चौड़ीकरण, विकास कार्यों और अन्य परियोजनाओं के दौरान काटे गए पेड़ों का निस्तारण भी एक बड़ी चुनौती बना रहता है। ऐसे में इस जैविक कचरे का वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल उपयोग करने के लिए नई तकनीकों का अध्ययन किया जा रहा है।
गोवा दौरे पर गए पार्षदों का दल संबंधित प्लांट में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीक और कार्यप्रणाली का विस्तृत अध्ययन करेगा। प्रतिनिधिमंडल यह समझेगा कि किस प्रकार अनुपयोगी लकड़ी को चारकोल में परिवर्तित किया जाता है और सूखे पत्तों व जैविक कचरे से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाती है। साथ ही प्लांट की लागत, संचालन, रखरखाव और उससे होने वाले आर्थिक लाभ का भी आकलन किया जाएगा।
नगर निगम का मानना है कि यदि यह मॉडल उज्जैन में लागू किया जाता है तो पेड़ों के कचरे के निस्तारण की समस्या का स्थायी समाधान मिल सकता है। इससे खुले में लकड़ी और पत्तों को जलाने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी, जिससे वायु प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
प्रतिनिधिमंडल अपनी अध्ययन रिपोर्ट नगर निगम प्रशासन को सौंपेगा। रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया जाएगा कि उज्जैन में भी इसी प्रकार का प्लांट स्थापित किया जा सकता है या नहीं। यदि योजना को मंजूरी मिलती है तो शहर में पेड़ों से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर जैविक खाद और चारकोल का उत्पादन किया जा सकेगा।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल कचरे का निस्तारण करना नहीं, बल्कि उसे उपयोगी संसाधन में बदलना भी है। इससे स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और नगर निगम को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। यह पहल उज्जैन को अधिक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

